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वीसी की जांच में खुलासा : आरयू में बगैर काम लाखों का भुगतान

7 वर्ष पहले
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जयपुर. राजस्थान यूनिवर्सिटी में अनुपस्थित रहने पर भी औसत 100 से अधिक ठेकाकर्मियों का रोजाना भुगतान करने का मामला सामने आया है। सालाना 60 से 90 लाख रुपए का बगैर काम के होने होने की आशंका व्यक्त की गई है। इसका खुलासा खुद यूनिवर्सिटी के कुलपति डॉ. देव स्वरूप की पहल पर शुक्रवार को तब हुआ, जब कुलपति ने ठेके पर लगे 901 कर्मियों की उपस्थिति की जांच कराई। इस जांच में 100 से अधिक ठेका कर्मी अनुपस्थित मिले।

इस जांच में यूनिवर्सिटी के फाइनेंस ऑफिसर व कुलसचिव भी शामिल हुए। यूनिवर्सिटी प्रशासन ने उन पांच एजेंसियों को तलब किया है, जो ठेके के तहत कर्मचारी उपलब्ध करवा रही है। इसी मामले में यूनिवर्सिटी ने शनिवार को सभी हैड्स व डायरेक्टर्स की एक बैठक भी बुलाई है। यूनिवर्सिटी में 901 ठेकाकर्मी है। कुलपति कहते हैं- हम सिर्फ ये चाहते है कि संसाधनों का पूरा उपयोग हो। जनता और छात्रों का पैसा यूं बर्बाद नहीं होने दूंगा।
ये सवाल उठ रहे हैं
> कई वर्षों से ये अनियमितताएं चल रही थी, अब तक किसी अधिकारी का इस तरह ध्यान क्यों नहीं गया। क्या मिलीभगत कोई बड़े लेवल पर थी।
> परीक्षा के दिनों में और प्रवेश प्रक्रिया के दौरान यूनिवर्सिटी में ठेकाकर्मियों की बड़ी संख्या में जरूरत पड़ती है। शेष दिनों में कोई खास जरूरत नहीं रहती। इसके बावजूद इन्हें क्यों खपाया गया जबकि यूनिवर्सिटी के आर्थिक हालात सही नहीं थे।
> अधिकांश हैड्स ये शिकायत करते रहे है कि स्टाफ की कमी है। किसी ने इस बात का पता क्यों नहीं लगाया कि 901 कर्मचारी कहां और क्या कर रहे हैं।
शक्ति को-ऑपरेटिव सोसायटी, अमेरू प्लेसमेंट, पिंकसिटी, सिक्योरिटी, एंजल केयर सोसायटी व राजस्थान सर्विसमैन वेलफेयर को-आपरेटिव सोसायटी को ठेका। सालाना 7 करोड़ का भुगतान हो रहा है।
अफसरों की मिलीभगत!
ठेके पर काम कर रहे कम्प्यूटर ऑपरेटर, डाटा ऑपरेटर, एलडीसी, इंजीनियरिंग संबंधित लेबर व गार्डन की देखरेख करने वाले कर्मचारियों को संबंधित विभागों के हैड्स से अपनी उपस्थिति मार्क करानी होती है। ये हैड्स कई बार कर्मचारियों की अनुपस्थिति के बावजूद इन्हें उपस्थित दर्शा कर भुगतान उठाने में मदद करते हैं। इस तरह से अनुपस्थित को उपस्थित दर्शाकर बोगस तरीके से भुगतान उठाया जाता है।