पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें

सख्ती में छिपी थी आत्मनिर्भरता की सीख

8 वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक
जयपुर। जयपुर में फ्रेंच की पहली ‘इंडो फ्रेंच कल्चरल सोसाइटी’ की संस्थापक आशा पांडेय का कहना है कि जरूरी नहीं कि प्रेम हमेशा हमें खुशियों से सराबोर होकर मिले। तेज हवाएं भी आंधियों से लड़ना सिखाती हैं। आशा बताती हैं कि 1977 में जब उन्होंने प्रशासनिक अधिकारी अशोक पांडेय से शादी की तो नए माहौल में खुद को ढालने के लिए उन्होंने कॅरिअर को नजरअंदाज कर दिया।
अब तक के सफर को याद करते हुए वे मुस्करा कर कहती हैं, ‘शुरू से ही अशोक ने घर में एक तरह का अनुशासन रखा। घर के सभी सदस्यों के लिए यह नियम था कि जब भी वे अपने व्यक्तिगत काम के लिए घर से बाहर जाएंगे तो सरकारी गाड़ी का इस्तेमाल न करते हुए निजी साधन का उपयोग करेंगे। इसके पीछे की जो उनकी असल सोच थी वह थी परिवार के सदस्यों को आत्मनिर्भर बनाना।
वे कहती हैं ‘जब अशोक की पोस्टिंग चूरू में थी तो एक दफा मुझे एक फंक्शन में बतौर चीफ गेस्ट आमंत्रित किया गया। तब मुझे कार चलानी नहीं आती थी। वहां जाने के लिए जब मैंने अशोक से ड्राइवर और गाड़ी का इंतजाम करने को कहा तो उन्होंने मुझे मना कर दिया। उस वक्त मुझे इस बात का बहुत बुरा लगा कि आज अगर मैं आत्मनिर्भर होती, तो मुझे शर्मिदा न होना पड़ता।
उस बात को एक सबक समझ कर मैंने एक बार फिर अपने कॅरिअर को दिशा देने की ठानी। शादी के लगभग सात साल बाद मैंने माहेश्वरी पब्लिक स्कूल में बच्चों को फ्रेंच पढ़ाने से अपने कॅरिअर की शुरुआत की। आज सोचती हूं कि उस दिन अशोक ने गाड़ी के लिए प्रतिबंधित नहीं किया होता तो शायद मैंने इस मुकाम तक आने की शुरुआत कभी नहीं की होती।