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चौगान स्टेडियम में खेलों के अलावा कोई गतिविधि न करें : सुप्रीम कोर्ट

9 वर्ष पहले
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जयपुर.सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि वह शहर के चौगान स्टेडियम में गैर खेल गतिविधियों का आयोजन नहीं करे। न्यायाधीश केएस राधाकृष्णन व दीपक मिश्रा की खंडपीठ ने यह आदेश मंगलवार को अनिल शर्मा की एसएलपी का निपटारा करते हुए दिया।
राज्य सरकार की ओर से आश्वस्त किया गया कि वे स्टेडियम में गैर खेल गतिविधियां नहीं करेंगे और न ही दुरुपयोग करेंगे। सुप्रीम कोर्ट ने स्टेडियम के बाहरी क्षेत्र में गतिविधियों के संबंध में कोई आदेश पारित नहीं किया।
अधिवक्ता संजीव पांडे ने बताया कि इससे पहले सु्प्रीम कोर्ट ने 9 मई 2011 को अंतरिम आदेश से चौगान स्टेडियम में गैर खेल गतिविधियों पर रोक लगा दी थी। एसएलपी में कहा कि चौगान स्टेडियम का निर्माण खेल गतिविधियों के लिए हुआ है लेकिन इसका उपयोग गैर खेल गतिविधियों शादी व अन्य समारोह सहित वाणिज्यिक उपयोग के लिए हो रहा है।
जबकि सुप्रीम कोर्ट ने जयललिता बनाम तमिलनाडु राज्य और कृष्णलाल गेरा बनाम हरियाणा राज्य के मामले में दिए निर्णयों में खेल स्टेडियमों में खेलों के अलावा अन्य गतिविधियों पर रोक लगाई थी। इसलिए चौगान स्टेडियम में भी गैर खेल गतिविधियों को रोका जाए। सुप्रीम कोर्ट ने प्रार्थी पक्ष की दलीलों से सहमत होते हुए चौगान स्टेडियम में स्थायी तौर पर गैर खेल गतिविधियों पर रोक लगा दी।
गौरतलब है कि एसएलपी में अनिल शर्मा ने हाईकोर्ट के 22 नवंबर 2006 के उस आदेश को चुनौती दी गई जिसमें उसकी पीआईएल को जनहित का मामला नहीं मानते हुए खारिज कर दिया था।
एसएमएस में उड़ रही हैं आदेश की धज्जियां
सवाई मानसिंह स्टेडियम में भी गैर खेल गतिविधियों पर हाईकोर्ट ने रोक लगा रखी है। इसके बावजूद यहां पर इस आदेश की धज्जियां उड़ रहीं हैं। स्टेडियम में क्रिकेट एकेडमी के नाम पर होटल संचालित है। यहां पर भी शादी समारोह हो चुके हैं। इसी तरह मोबाइल टॉवर भी लगा रखा है। जिसका किराया वसूला जाता है। कुछ विज्ञापन फिल्मों की शूटिंग भी स्टेडियम में हो चुकी है।