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कोई बीमारी नहीं, निलंबित SP को अस्पताल से जेल भेजा

9 वर्ष पहले
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जयपुर.अजमेर के निलंबित एसपी राजेश मीणा को मेडिकल बोर्ड ने फिट बताया है। इसके बाद मीणा को गुरुवार शाम एसएमएस अस्पताल से जयपुर सेंट्रल जेल भेज दिया गया। पांच सदस्यीय मेडिकल बोर्ड ने गुरुवार को अपनी विस्तृत रिपोर्ट एसएमएस प्रशासन को सौंप दी। जांच में ऐसी कोई बीमारी नहीं निकली, जिसके चलते उन्हें अस्पताल में भर्ती रखा जाए। रिपोर्ट आने के बाद अस्पताल प्रशासन ने मीणा को डिस्चार्ज करने का आदेश दिया और जेल प्रशासन को भी उन्हें ले जाने की सूचना दे दी।
हालांकि, यूनिट हैड डॉ. आरसी मीणा उन्हें डिस्चार्ज करने को तैयार नहीं थे। वे मीडिया को यह तर्क देते रहे कि राजेश मीणा की हालत डिस्चार्ज करने लायक नहीं है। करीब दो घंटे बाद भी जब मीणा को डिस्चार्ज नहीं किया गया तो अस्पताल प्रशासन को दुबारा दखल देनी पड़ी। आखिरकार राजेश मीणा को शाम करीब साढ़े 5 बजे अस्पताल से जयपुर जेल रवाना किया गया।डीजी (जेल) ओमेंद्र भारद्वाज ने उनको अजमेर के बजाय जयपुर जेल में रखने का निर्देश दिया था।
गौरतलब है कि राजेश मीणा को रविवार रात 10 बजे अजमेर जेल से एसएमएस अस्पताल जयपुर लाकर भर्ती कराया गया था। हालांकि इलाज के बजाय उनको अस्पताल में ज्यादा से ज्यादा रोकने की कोशिशों पर भास्कर ने सबसे पहले इशारा किया, जिसके बाद एसएमएस अस्पताल अधीक्षक ने एक मेडिकल बोर्ड बनाया। बोर्ड ने मंगलवार को प्राथमिक रिपोर्ट देकर फाइनल रिपोर्ट के लिए दो दिन का समय मांगा था। गुरुवार सुबह बैठक के बाद बोर्ड ने अस्पताल प्रशासन को रिपोर्ट सौंप दी। उसके आधार पर अस्पताल अधीक्षक डॉ. वीरेंद्र सिंह ने मीणा को डिस्चार्ज करनेका आदेश जारी कर यूनिट हैड को सूचना दी।
यूनिट हैड अस्पताल में रोकने की दलील देते रहे
मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट के बाद अस्पताल प्रशासन ने करीब ढाई बजे मीणा को डिस्चार्ज करने की बात सार्वजनिक कर दी। इसके बाद संबंधित यूनिट हैड डॉ. आरसी मीणा से डिस्चार्ज की बात पूछी गई तो वे यह दलील देते रहे कि उनकी स्थिति ऐसी है कि बाहर निकलते ही कुछ भी हो सकता है। साथ ही वे ऐसे उदाहरण देने लगे कि इसी तरह के मामलों में किसी कैदी को बाहर निकाला तो उसे स्वास्थ्य संबंधी परेशानी हो गई और फिर डॉक्टरों को जवाब देना भारी पड़ा।
मौजूद मीडियाकर्मियों ने बोर्ड की रिपोर्ट और अस्पताल प्रशासन के आदेशों का हवाला दिया तो उन्होंने अपना काम करने की बात कही। अस्पताल अधीक्षक को इसकी सूचना लगी तो उन्होंने दुबारा से डॉ. मीणा से बात कर डिस्चार्ज के लिए कहा।
दो दिन की जांच, चार दिन में हुई
रविवार देर रात मीणा को अस्पताल में लाने के बावजूद दूसरे दिन तक उनकी एमआरआई नहीं कराई गई। जबकि अस्पताल में 24 घंटे इसकी सुविधा मौजूद है। सोमवार देर रात करीब साढ़े 11 बजे उनकी एमआरआई हुई। इसके दूसरे दिन डॉक्टरों ने कई ऐसी जांचें लिख दी, जिनसे संबंधित बीमारी के लक्षण ही मीणा को नहीं थे। वहीं रिपोर्ट देखने में भी समय खपाते रहे।
मेडिकल बोर्ड ने यह कहा
राजेश मीणा को ऐसी कोई गंभीर बीमारी नहीं है, जिसके चलते उन्हें यहां रोका जाए या फिर उनका इलाज अजमेर में नहीं हो सकता। उनकी एमआरआई व अन्य जांचों से यह बात साफ हो गई है। मीणा की स्वास्थ्य संबंधी कुछ जांचें अजमेर अस्पताल में भी हो चुकी थी। उन्हें वहां से जयपुर लाने की अहम वजह वहां उनकी एमआरआई नहीं होना और न्यूरोसर्जन का छुट्टी पर होना थी।
एसएमएस अस्पताल प्रशासन ने भी इसकी पुष्टि की थी। यहां भर्ती होने के बाद यूनिट हैड डॉ. आरसी मीणा ने प्रशासन को लिखकर सूचित किया कि राजेश मीणा को तेज कमर दर्द, पांव व घुटनों में कमजोरी और बार-बार पेशाब आने की परेशानी है।