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'अब वसुंधरा राजे का मूड और माइंड बदल गया है'

9 वर्ष पहले
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जयपुर.भाजपा में वसुंधरा राजे के धुर विरोधी रहे प्रमुख नेता कैलाश मेघवाल ने कहा है कि वसुंधरा राजे का मूड और माइंड अब बदल गया है। उन्होंने अनुभवों से बहुत कुछ सीखा है। इस चुनाव में उनके चेहरे और नाम का भरपूर फायदा पार्टी को मिलेगा। वे अपने विरोधियों को परास्त करने और अपने आपको मुख्यमंत्री पद का स्वाभाविक दावेदार बनाने में सबल और सक्षम साबित हुई हैं। मेघवाल ने कुछ समय पहले ही सीएम इन वेटिंग के सवाल पर कहा था कि न सूत, न कपास और जुलाहों में लट्ठम लट्ठा।
भास्कर ने मेघवाल के बदले हुए विचारों की वजह जानने के लिए उनसे खुलकर बातचीत की। हमने तीन महीने और 27 दिन बाद उनसे ठीक वही सवाल पूछे, लेकिन अब जवाब बिलकुल ही अलग थे, जो बताते हैं कि राजनीति क्या है! पढ़िए उनके बेबाक विचार :
मौजूदा प्रदेश नेतृत्व कैसा है?
वसुंधरा राजे अब निष्क्रिय नेताओं को सक्रिय करके संगठन में जान फूंक रही हैं। संगठन में जो भ्रम की स्थिति थी, वह दूर हो गई है। वे संगठन को निश्चित दिशा दे रही हैं।
भाजपा की भूमिका अब प्रतिपक्ष के रूप में कैसी रहेगी?
भाजपा विधायक दल अब गुलाबचंद कटारिया के जीवट वाले नेतृत्व में प्रतिबद्धता और प्रामाणिकता से काम करेगा।
वसुंधरा राजे ने प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा तक देने की धमकी दी थी।
उन्होंने अति उत्साह में कुछ ऐसे कदम उठा लिए थे। अनुभव से उन्होंने बहुत कुछ सीखा है। इसीलिए उन्होंने अपने कदमों को संगठनात्मक दृष्टि से पार्टी के हित में अब ठीक किया है। अब उनका मूड भी बदल गया है और माइंड भी। सच तो ये है कि वे परिस्थितियों को अपने अनुकूल ढालने और भावी मुख्यमंत्री प्रोजेक्ट करवाने में सबल और सक्षम रही हैं।
सीएम इन वेटिंग पर आप क्या कहेंगे?
वसुंधरा ही मुख्यमंत्री होंगी। असाधारण परिस्थतियां पैदा नहीं होती हैं तो उनके मुख्यमंत्री बनने में संदेह कहां है!
2003 के चुनाव में वसुंधरा राजे के नेतृत्व में 120 सीटें नहीं जीती थीं?
भैरोसिंह शेखावत दिल्ली चले गए थे। पॉलिटिकल सिनेरियो को किसी सितारे की तलाश थी। ऐसे में वसुंधरा राजे नाम का चेहरा उस समय नया था। वे सफल केंद्रीय मंत्री रह चुकी थीं। इसीलिए पार्टी को 120 सीटें मिलीं थी।
क्या आज भाजपा एकजुट है?
पार्टी आज वसुंधरा राजे के नेतृत्व में एकजुट है। वे 2003 से भी अच्छी स्थिति में पार्टी को ला देंगी। पार्टी 120 से ज्यादा सीटें जीतेगी।
आप कहां से चुनाव लड़ेंगे?
मेरी तैयारी तो कपासन से है।
टिकटें तो कोर ग्रुप तय करेगा, जिसने आपकी टिकट काट दी थी।
वो तो पिछली बार गड़बड़ियां हुई थी। एक्सपीरिएंस बेस्ट टीचर होता है। वसुंधरा इस बार कोर ग्रुप में गड़बड़ियां नहीं होने देंगी, मुझे भरोसा है।
आपने पांच हजार करोड़ रुपए के आरोप किस आधार पर लगाए थे?
मैंने मैडम पर सार्वजनिक रूप से कभी कोई आरोप नहीं लगाया। पार्टी मंच पर बहुत तरह की बातें होती हैं। गॉसिप और लाइट मूड की बातें भी हो जाती हैं। लेकिन मैंने पार्टी मंच पर क्या कहा, यह बताने के लिए मैं बाध्य नहीं हूं!
चुनाव में अशोक गहलोत ने आपके आरोपों को चुनाव अभियान का हिस्सा बनाया था!
अशोक गहलोत ने कभी कोई आरोप अपनी तरफ से लगाया है क्या! वे सब लोगों की कही-अनकही और अप्रामाणिक बातें दुहराते रहते हैं। जनता ने उन्हें मुख्यमंत्री बनाया और वे नेता प्रतिपक्ष की भूमिका निभा रहे हैं। कोई उन्हें समझाए कि आपके पास एसीबी थी, पुलिस थी, लोकायुक्त था, कानून थे, जांच कराने की हर पावर थी, केंद्र में आपकी सरकार थी, सीबीआई थी, आपके पास ऐसा सिस्टम था कि आप कहीं से भी कुछ भी प्रमाणित कर करके दोषी को सजा दे सकते थे। लेकिन अगर आप झूठे ही आरोपों के सहारे राजनीति करेंगे तो लोग आपको बाहर कर देंगे! जैसा कि होने जा रहा है।
जसवंतसिंह ने सबसे पहले कहा था कि वसुंधरा राजे के नेतृत्व में विधानसभा चुनाव हो।
राजनीति में परिस्थितियां बदल जाती हैं तो सोच भी बदल जाती है! पुराने स्टैंड छोड़ने के हालात बन जाते हैं। परिवर्तित परिस्थितियों में वसुंधरा राजे की कल्पना सबसे पहले जसवंतसिंह ने की। आज मैं भी उनके स्वर में स्वर मिला रहा हूं!
राजेंद्र राठौड़ ने कहा कि वसुंधरा ही भाजपा और भाजपा ही वसुंधरा है?
मैं उनके इस बयान से आज भी असहमति व्यक्त करता हूं!
पार्टी की परिवर्तन यात्रा? आपकी भूमिका?
विचार चल रहा है। रोडमैप बन रहा है। वे ही मेरी भूमिका तय करेंगी।
आपने कुछ समय पहले कहा था कि पार्टी का प्रदेश नेतृत्व निष्क्रिय ही नहीं, कुंठित भी है!
मैंने क्या गलत कहा था! ये प्रदेश नेतृत्व में आया बदलाव मेरी ही बात को तो साबित करता है। मेरी बात सही थी, तभी तो नेतृत्व परिवर्तन हुआ!

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