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आरटीई : ऑन लाइन लाटरी में गड़बडिय़ों की भरमार, कई स्कूल शामिल नहीं

8 वर्ष पहले
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जयपुर. शिक्षा का अधिकार कानून के तहत निशुल्क प्रवेश के लिए निकाली गई लॉटरी में गड़बडिय़ों की भरमार रही। प्रवेश में वार्ड के विद्यार्थियों को प्राथमिकता नहीं मिली तो कई निजी स्कूल की लॉटरी ही नहीं खुल सकी, जबकि उन्होंने एंट्री भी पूरी कर ली थी। शुक्रवार को कई अभिभावक व निजी स्कूल संचालक अपनी परेशानी लेकर शिक्षा संकुल पहुंचे।

उन्होंने अपनी पीड़ा सर्व शिक्षा अभियान की आरटीई सेल व जिला शिक्षा अधिकारी माध्यमिक व प्रारंभिक कार्यालय में अधिकारियों को अपनी पीड़ा सुनाई। आरटीई के सलाहकार रामपाल शर्मा ने बताया कि अगर वार्ड के बच्चों को प्राथमिकता नहीं दी गई है और स्कूल में फॉर्म जमा कराने के बावजूद वेब पोर्टल पर फॉर्म प्राप्त नहीं होने की जानकारी अंकित है तो अभिभावक इसकी शिकायत जिला शिक्षा अधिकारी को कर सकते हैं। इसमें आठवीं कक्षा तक के स्कूल के अभिभावक डीईओ प्रारंभिक व सेकंडरी व सीनियर सेकंडरी कक्षा तक के स्कूलों के अभिभावक डीईओ माध्यमिक को शिकायत कर सकते हैं। ऐसे मामलों की जांच कराई जाएगी।

वार्ड वाले शामिल नहीं हुए
एमजीपीएस स्कूल में लॉटरी में वार्ड के कई बच्चों का प्रवेश नहीं हो सका। प्राथमिकता क्रमांक में स्कूल के बाहर के वार्ड के बच्चे उनसे ऊपर आ गए। पेरेंट्स वेलफेयर सोसायटी के संयोजक दिनेश कांवट ने कहा कि ऐसे कई स्कूल हैं। जहां वार्ड के बच्चों को प्राथमिकता नहीं मिली। विभाग को ऐसे मामलों की जांच करानी चाहिए।

एंट्री के बाद भी नहीं खुली लॉटरी
शास्त्री नगर के हरिराम साबू स्कूल के प्रतिनिधि ने बताया कि उन्होंने एंट्री पूरी कर दी थी, इसके बावजूद उनके स्कूल की लॉटरी नहीं खुली।

181 स्कूलों ने नहीं दिया प्रवेश, मिलेगा नोटिस
लॉटरी में 1503 स्कूलों में से 181 ने प्रवेश नहीं दिया। स्कूलों ने दावा किया कि उनके यहां आरटीई के प्रवेश के लिए कोई नहीं आया। विभाग इन स्कूलों को अब नोटिस जारी कर रहा है।