जयपुर. लोकायुक्त एसएस कोठारी ने सड़कों पर वाहन खड़े करने की प्रवृित्त व िजम्मेदार एजेंसियों की नजरअंदाजी को गंभीरता से लिया है। स्वप्रेरित प्रसंज्ञान लेते हुए लोकायुक्त ने कहा है- राजधानी में सड़कों पर घरों के बाहर पार्क किए जा रहे वाहनों के रजिस्ट्रेशन सप्ताहभर तक अभियान चला कर रद्द किए जाएं। इस मामले में गृह विभाग, ट्रांसपोर्ट विभाग, जयपुर नगर निगम एवं जेडीए मिलकर काम करें।
लोकायुक्त ने एसीएस गृह एवं एसीएस परिवहन से पूछा है- घरों में पार्किंग के अभाव में सड़कों पर वाहन खड़े करने वाले लोगों के विरुद्ध मोटर व्हीकल एक्ट की धारा 122, 126 व 127 तथा रोड रेग्यूलेंशंस, 1989 के नियम 15 के अंतर्गत कार्यवाही क्यों नहीं की जा रही है? नगर निगम सीईओ एवं जेडीए आयुक्त से पूछा है- ऐसे मामलों में राजस्थान म्युनिसिपैलिटी एक्ट की धारा 253, 254 एवं 255 तथा जेडीए एक्ट, 1972 की धारा 72 के अंतर्गत कार्यवाही क्यों नहीं की जाती? जयपुर में पंजीकृत पांच लाख कारों में से करीब 15 प्रतिशत कार मालिकों के पास ही इनकी पार्किंग के लिए स्थान है। लोकायुक्त के आदेश पर आरटीओ विजयपाल सिंह, नगर निगम सीईओ ज्ञानाराम और जेडीए अफसर कहते हैं- अभी हमें लोकायुक्त के आदेश नहीं मिले हैं। मिलने पर जो उचित होगा वो कार्रवाई करेंगे।
लोकायुक्त एक स्वतंत्र बॉडी है। स्टेटस हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस के बराबर माना जाता है। इसी के अनुसार राज्य सरकार इन्हें सुविधाएं देती है। राजस्थान में लोकायुक्त सरकार से अनुशंसा करते हैं। सरकार इनकी अनुशंसा नहीं मानती है तो यह अपनी रिपोर्ट राज्यपाल को सौंपते हैं और यहां से इसे विचार के लिए विधानसभा में रखा जाता है।