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विधानसभा में उठ रहे पंचायत स्तर के सवाल

9 वर्ष पहले
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जयपुर.विधानसभा में अब नगरपालिका और पंचायत समिति में हल हो सकने वाली समस्याओं से जुड़े सवाल भी पूछे जा रहे हैं। ऐसे में पंचायतीराज व्यवस्था और स्थानीय निकाय प्रणाली की व्यवस्थाओं पर सवाल उठने लगे हैं। विधायकों का तर्क है कि जब निचले स्तर पर समस्या का समाधान नहीं होता है तो उन्हें ऐसे सवाल विधानसभा में उठाने पड़ते हैं।
भास्कर ने 13वीं विधानसभा के चौथे सत्र से लेकर 9वें सत्र में सूचीबद्ध 2500 से ज्यादा सवालों की पड़ताल की। इसमें कई ऐसे हैं, जो ग्राम पंचायत, शहर के वार्ड और किसी एक कर्मचारी से जुड़े हैं। पूर्व विधानसभा अध्यक्षों ने इस पर चिंता जताई है।
विधानसभा का बजट सत्र आज से
राज्य विधानसभा का बजट सत्र गुरुवार से शुरू होगा। इसमें पहले दिन राज्यपाल मारग्रेट अल्वा सुबह 11 बजे अपना अभिभाषण पढ़ेंगी। राज्यपाल अभिभाषण हिंदी में पढ़ेंगी या अंग्रेजी में इसे लेकर संशय बना हुआ है।
पूर्व विधानसभा अध्यक्ष हरिशंकर भाभड़ा का कहना है कि विधानसभा में सवाल पूछने के नियम बने हुए हैं, नितांत व्यक्तिगत किस्म के सवाल आप नहीं पूछ सकते।
स्पीकर को अधिकार है कि वह इस तरह के सवाल रोक दे। उधर, कुछ विधायकों ने यह भी कहा कि जनता से जुड़े सवाल छोटे या बड़े नहीं होते।
ये हैं सवालों के तरीके
जिन सवालों का सदन में संबंधित विभाग के मंत्री मौखिक जवाब देते हैं वे तारांकित श्रेणी सवाल हैं। जिनका उत्तर लिखित में दिया जाता है वे अतारांकित सवाल हैं। विधानसभा सत्र के अलावा जो सवाल पूछे जाते हैं वे अंत: सत्र सवाल होते हैं। जो सवाल सूचीबद्ध होने से रह जाते हैं, उन्हें स्पीकर चाहे तो अंत: सत्र सवालों की श्रेणी में रखकर जवाब विधायकों को लिखित में भिजवाए जाते हैं।
जनता से जुड़ा सवाल छोटा-बड़ा नहीं होता
जनता से जुड़ा कोई कोई मुद्दा होता है तो वह छोटा हो या बड़ा उस पर ही सवाल लगाते हैं। स्थानीय स्तर पर समस्या का हल नहीं होने पर ही सवाल लगाते हैं, ये दोनों सवाल भी मैंने इसीलिए लगा दिए, यही बात है।
- आदराम मेघवाल, कांग्रेस विधायक
स्थानीय स्तर पर सुनवाई ही नहीं होती
ट्रेलर वाला सवाल तो कायदे से विधानसभा में लगना ही नहीं चाहिए था। लेकिन स्थानीय स्तर पर सुनवाई ही नहीं होती। जो लोग पीड़ित थे वे मेरे विरोधी दल के थे, उन्होंने मुझसे परेशानी बताते हुए मदद की मांग की तो मैंने सवाल लगाया। सवाल लगने के बाद भी इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं हुई।
- अनिता बघेल, भाजपा विधायक
सवाल पूछते कैसे हैं?
हर विधायक को बजट सत्र में 40 तारांकित व 60 अतारांकित को मिलाकर 100 सवाल पूछने का अधिकार होता है। बाकी सत्रों में 10 तारांकित व 20 अतारांकित सहित 30 सवाल पूछे जा सकते हैं। विधानसभा सचिवालय में तय फॉर्मेट में सवाल लिखकर भिजवाए जाते हैं। विधानसभा सचिवालय विधायकों के सवालों का श्रेणीवार विभाजन करता है।
विधानसभा अध्यक्ष सवाल के सूचीबद्ध करने पर फैसला करते हैं। सूचीबद्ध सवाल विधानसभा सत्र के समय ही किए जाते हैं। जो सवाल सूचीबद्ध नहीं हो पाते उन्हें अंत: सत्र सवाल की श्रेणी में लेकर विधायकों को उनके लिखित जवाब भिजवाए जाते हैं। हर विधायक सत्र नहीं होने पर हर सप्ताह एक अतारांकित सवाल पूछ सकता है।
सवाल आया तो सदन से नदारद हो गए
विधानसभा में सवाल पूछकर सदन से विधायकों के गायब होने के कई मामले सामने आए हैं। पिछले बजट सत्र के दौरान भाजपा विधायक निर्मल कुमावत सवाल पूछकर सदन से गायब हो गए थे, बाद में विधायक ने स्पष्टीकरण दिया कि परिवार में किसी का देहांत हे जाने के कारण उन्हें गांव जाना पड़ा और वे सदन में नहीं आ सके। इससे पहले बसपा के विधायक रहते माहिर आजाद भी सवाल पूछकर सदन से गायब हो गए थे।
प्रश्नकाल क्यों, कब से?
संसदीय प्रणाली में लोकसभा और विधानसभा के गठन के समय से ही सदन की कार्यवाही प्रश्नकाल से ही शुरू होती है। मार्च 1952 में राजस्थान विधानसभा के गठन के समय से ही प्रश्नकाल की व्यवस्था है। पं. नरोत्तम लाल जोशी पहले विधानसभा अध्यक्ष थे।
सवालों पर सवाल
श्मशान की चारदीवारी बनेगी या नहीं?
क्या सरकार गोविंदगढ़ पंचायत समिति के टांकरड़ा गांव में श्मशान भूमि पर चारदीवारी बनाने का विचार रखती है? यदि हां, तो कब तक?
-राजकुमार रिणवा, अतारांकित सवाल,
29 अगस्त, 2011
शिक्षक को निलंबित क्यों और कब किया?
टाउन नं. 2 मालपुरा के अध्यापक जतन लाल को किस कारण व कब निलंबित किया?, आरोप क्या हैं, जांच अधिकारी कौन है? क्या सरकार उन्हें राहत देने का विचार रखती है ?
-रणवीर पहलवान, अतारांकित सवाल,
3 सितंबर, 2010
विधायकों का तर्क : कोई सवाल छोटा-बड़ा नहीं होता
गांव में कितने हैंडपंप खराब हैं?
वर्तमान में बस्सी के दयालपुरा गांव में कितने हैण्डपंप खराब हैं? क्या सरकार खराब हैंड पंपों को ठीक कराने का विचार रखती है?
-आदराम मेघवाल, अतारांकित, 11 अक्टूबर, 2012
ट्रेलर को थाने से क्यों छोड़ा?
सवाल : क्या आदर्श नगर थाना पुलिस ने 10 जून, 2010 की रात ट्रेलर संख्या आर जे 01 जी ए 0657 को जब्त किया था?, इस्तगासे में ट्रेलर को कोर्ट से छोड़े जाने का जिक्र किया है? यदि हां, तो पुलिस द्वारा 12 जून 2010 को थाने पर ही जुर्माना राशि लेकर ट्रेलर को क्यों छोड़ा गया?
-अनिता बघेल, अतारांकित सवाल, 26 अगस्त, 11
.कंडक्टर का तबादला दूर क्यों?
क्या अजयमेरू आगार के कंडक्टर सोहनलाल की बस का उड़नदस्ते ने औचक निरीक्षण किया था? बिना टिकट यात्री नहीं होने के बावजूद रिमार्क लगा दिया गया था? क्या संबंधित अधिकारी व मंत्री को ज्ञापन देने के बावजूद कंडक्टर का तबादला दूर कर दिया। एक साल बाद भी जांच पूरी नहीं की गई?-अजय सिंह, तारांकित सवाल, 12 अक्टूबर, 2012
कौन करा रहा है प्लॉट पर निर्माण?
क्या नगर परिषद हनुमानगढ़ ने भूखंड सं. 46 सेक्टर नंबर 9/2 पर फ्लैट्स बनाने के लिए सेना विश्नोई के नाम से निर्माण मंजूरी जारी की है? क्या इस पर वर्तमान में निर्माण दूसरा व्यक्तिकरा रहा है?
-आदराम मेघवाल, अतारांकित, 12 अक्टूबर, 2012
निचले स्तर की प्रशासनिक व्यवस्था कमजोर इसलिए आ रहे हैं ऐसे सवाल : विधानसभा उपाध्यक्ष
विधानसभा उपाध्यक्ष रामनारायण मीणा का कहना है, अगर सामान्य श्रेणी के सवाल आते हैं तो यह निचले स्तर की प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल है। विधायक के पास विधानसभा ही प्लेटफार्म है जहां वे सवाल के जरिये समस्या उठाते हैं। फिर भी उन्हें ऐसे सवाल उठाने से बचना चाहिए।
सवालों का गिरता स्तर चिंतनीय : सुमित्रा
पूर्व विधानसभा अध्यक्ष सुमित्रा सिंह का कहना है, विधानसभा में सवालों व बहस का स्तर लगातार गिर रहा है। विधायक पढ़ते हैं नहीं और दूसरी उधेड़बुन में लगे रहते हैं? सवालों के गिरते स्तर पर विधानसभा अध्यक्ष, सरकार और नेता प्रतिपक्ष को साथ बैठकर विचार करना चाहिए।
नियम ये हैं
सवाल पूछने के बारे में विधानसभा के प्रक्रिया व कार्य संचालन नियमों के नियम 37 में प्रावधान किए हुए हैं। व्यक्तिगत स्तर और जिनसे जनहित नहीं हो, वैसे सवाल नहीं पूछे जा सकते।
विधानसभा सत्र के लिए सवाल सूचीबद्ध होने के बाद तारांकित प्रश्न के समय विधायक का सदन में मौजूद रहना जरूरी होता है। विधायक के मौजूद नहीं रहने की स्थिति में उस सवाल का जवाब नहीं दिया जाता। सत्र के दौरान हर विधायक को प्रश्नकाल में आने वाले तारांकित व अतारांकित प्रश्न सूची दी जाती है।
यह था पहला सवाल
विधानसभा का गठन होने के 11वें दिन 14 अप्रैल 1952 को पहला प्रश्नकाल हुआ। इस दिन सुबह 8:30 बजे प्रश्नकाल शुरू हुआ। पहला सवाल श्रीगंगानगर से कांग्रेस विधायक मोतीराम सहारण ने पूछा था। सवाल था- क्या स्वायत्त शासन मंत्री बताने का कष्ट करेंगे कि सरकार दलित व गरीब लोगों को म्यूनिसिपल हद में मकान बनाने के लिए जमीन देने का प्रबंध करने का विचार रखती है?