जयपुर. शहरों की सड़कों पर दिनों दिन बढ़ता वाहनों का दबाव और सड़कों पर पार्किंग के कारण ट्रैफिक जाम की स्थायी होती समस्या को देखते हुए लोकायुक्त ने सात दिन के भीतर ऐसा सभी वाहनों का रजिस्ट्रेशन रद्द करने को कहा है। हालांकि यही आदेश हाईकोर्ट दो साल पहले दे चुका है। हाईकोर्ट ने कहा था कि 30 फीट से कम चौड़ी सड़क पर पार्किंग नहीं हो। वाहन का रजिस्ट्रेशन तभी किया जाए जब वाहन मालिक पार्किंग की जगह होने का शपथ पत्र दे। न तो ट्रांसपोर्ट विभाग ने इसे गंभीरता से लिया। मकानों के बाहर सड़क पर खड़े होने वाले वाहनों को ट्रैफिक पुलिस ने भी नहीं रोका। मकान का नक्शा पास करने के दौरान जेडीए व नगर निगम भी आंखें मूंद ली और पार्किंग की जगह देखे बगैर ही नक्शे पास होते गए। नतीजा, अब भी हजारों कारें व दोपहिया वाहन सड़कों पर ही खड़े होते हैं।
दो साल पहले अदालत ने भी चेताया था
29 मार्च 2012 को हाईकोर्ट ने परिवहन विभाग को आदेश दिया था- उन्हीं वाहनमालिकों का रजिस्ट्रेशन किया जाए,जिनके घर में कार पार्किंग की व्यवस्था हो। इस संबंध में वाहन मालिकों से शपथ-पत्र लिया जाए। साथ ही, तय किया जाए कि 30 फीट से कम चौड़ी सड़क पर वाहनों की पार्किंग न होने दी जाए।
परिवहन विभाग ने नियम बनाया, लागू नहीं करवा सका
30 अप्रैल, 12 को परिवहन विभाग ने वाहन रजिस्ट्रेशन को लेकर नया नियम बना दिया और प्रदेश के सभी आरटीओ और डीटीओ अधिकारियों को उसे लागू करने के निर्देश भी दिए गए। नियमानुसार वाहन का रजिस्ट्रेशन तभी होना था जबकि वाहन मालिक को पार्किंग स्थल की जानकारी दे। चौपहिया-तिपहिया वाहन चालक को रजिस्ट्रेशन से पहले शपथ-पत्र देकर बताना था कि उसके पास गाड़ी खड़ी करने की जगह है। उसके बाद ही रजिस्ट्रेशन किया जाता।
फोटो- जयलाल मुंशी का रास्ता