(ट्रॉमा सेंटर के अंदर की फोटो।)
जयपुर. सरकार के एक वर्ष की उपलब्धियों को भुनाने के लिए चिकित्सा विभाग के नुमाइंदे भले ही ट्रॉमा सेंटर के उद्घाटन के लिए दिन-रात एक कर रहे हों लेकिन यह उपलब्धि केवल फीता काटने की रस्म तक सीमित रहनी है। 13 दिसम्बर को प्रदेश के सबसे बडे़ ट्रॉमा सेंटर के उद्घाटन की तैयारियां जोरों पर चल रही हैं।
लेकिन हकीकत यह है कि ट्रॉमा सेंटर का काम 13 दिसम्बर तक किसी भी तरह पूरा नहीं किया जा सकता। यदि किसी तरह उद्घाटन भी कर दिया जाता है तो मरीजों को उपचार के लिए कम से कम अगले एक माह का इंतजार करना पड़ेगा। काम पूरा करने के लिए युद्धस्तर पर मजदूरों को लगाया गया है, अधिकारी दिन में तीन से चार बार दौरा कर रहे हैं। कहीं घिसाई का काम चल रहा है तो कहीं दीवार की खड़ी की जा रही है। हालात ये हैं कि जिन स्टाफ को यहां वार्ड तैयार करने और अन्य तैयारियां पूरी करने के लिए कहा है, वे कमरों में भरे सामान के हटने का इंतजार कर रहे हैं। वे अस्पताल प्रशासन को लिखित में इसकी जानकारी दे चुके हैं कि यदि कमरों से सामान नहीं हटा तो वे कुछ भी तैयारी नहीं कर पाएंगे।
प्रयास रहे विफल, नहीं आए डॉक्टर्स
सरकार ने डाक्टर्स भर्ती के लिए विज्ञापन भी दिए लेकिन कोई नहीं आया। वहीं दूसरी ओर न्यूरोसर्जरी के एक डॉक्टर वीआरएस लेकर निजी अस्पताल चले गए हैं।
बड़ी चुनौती अतिक्रमण हटवाना
ट्रॉमा सेंटर के प्रवेश गेट के बाहर ठेले और एंबुलेंस चालकों ने पार्किंग बना रखी है। कुछ ठेले तो सेंटर के गेट से ही अड़े हैं। उन्हें हटवाना प्रशासन के लिए चुनौती बना हुआ है। यदि अतिक्रमण नहीं हटा तो मरीजों की गाडिय़ां आने में ही परेशानी होगी।
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