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जब हिंदुस्तान ने किया परमाणु परीक्षण तो अमेरिका और पाकिस्तान की गुम हो गई थी सिट्टी-पिट्टी

Dainik Bhaskar

Aug 06, 2013, 01:20 PM IST

जब भी परमाणु परीक्षण का ज़िक्र आता था, पूरी दुनिया की निगाहें भारत पर टिक जाती थीं।

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68 साल पहले अमेरिका ने जापान के दो शहरों हिरोशिमा और नागासाकी पर परमाणु बम गिराए थे। यह मानवजाति के इतिहास में परमाणु हथियारों का सबसे पहला प्रयोग था। लेकिन भारत ने परमाणु बम का परीक्षण हमेशा शांति के लिए किया।
11 मई, 1998 को भारत ने राजस्थान के पोखरण में दूसरा परमाणु परीक्षण किया था। इससे पहले 18 मई 1974 को पहला परमाणु परीक्षण किया गया था। उस दौर में जब भी परमाणु परीक्षण का ज़िक्र आता था, पूरी दुनिया की निगाहें भारत पर टिक जाती थीं। अमेरिकन सेटेलाइट भारत पर खास नजरें गड़ाएं हुईं थी, लेकिन तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में कलाम और उनकी टीम ने इस ऑपरेशन को ऐसे अंजाम दिया कि अमेरिका सहित पूरी दुनिया आवाक रह गई थी।
इसका नाम दिया गया था ऑपरेशन शक्ति। इस ऑपरेशन को बेहद गुप्त रखा गया। बताते चलें कि वाजपेयी सरकार के कई मंत्रियों को भी इसकी भनक नहीं थी। जब थार के रेगिस्तान में धमाका हुआ तो पूरी दुनिया भौंचक्की रह गई। पाकिस्तान और चीन के मानो कंठ सूख गए। बौखलाए अमेरिका ने भारत पर दनादन पाबंदियां लगा दी। फिर इससे विचलित हुए बिना अटल सरकार अटल बनी रही।
भारत ने 11 और 13 मई, 1998 को राजस्थान के पोरखरण परमाणु स्थल पर पांच परमाणु परीक्षण किये थे। इनमें 45 किलोटन का एक तापीय परमाणु उपकरण शामिल था। इसे आमतौर पर हाइड्रोजन बम के नाम से जाना जाता है। 11 मई को हुए परमाणु परीक्षण में 15 किलोटन का विखंडन उपकरण और 0.2 किलोटन का सहायक उपकरण शामिल था।
गौरतलब है कि तत्कालीन रक्षा मंत्री के वैज्ञानिक सलाहकार कलाम के अलावा उस समय परमाणु उर्जा आयोग के अध्यक्ष आर चिदंबरम और भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र के निदेशक रहे अनिल काकोडकर ने पोखरण-2 परमाणु परीक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
98 में हुए परमाणु परीक्षण को 1995 में तत्कालीन प्रधानमंत्री पी वी नरसिंहराव ने कराने का फैसला लिया था, लेकिन अमेरिकी सैटेलाइट ने परीक्षण की तैयारियों का पता लगा लिया। उसके बाद ही इस ऑपरेशन को दुनिया की नजरों में ठंडे बस्ते में डाल दिया गया।
आगे स्लाइड्स पर क्लिक कर जानिए आखिर क्या हुआ था, जब भारत ने किया विस्फोट

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दुनिया की सबसे तेज-तर्रार खुफिया एजेंसी के भी होश उड़ गये थे जब लगी ये 'खबर'
 
भारत ने मई, 1998 में दुनिया की सबसे तेज-तर्रार खुफिया एजेंसी के रूप में पहचाने जाने वाली सीआइए (अमेरिका की खुफिया एजेंसी) समेत पुरी दुनिया को चौंका दिया था। उसने राजस्थान के पोखरण में तीन दिनों के अंदर पांच शक्तिशाली बम धमाके किए लेकिन इसकी खबर किसी भी विदेशी खुफिया एजेंसी को नहीं लग पाई। यहां तक कि परमाणु परीक्षणों के मामले में भारत की हर गतिविधियों पर नजर रखने वाली सीआइए भी इस बार मात खा गई। उसे जब भारत के परमाणु परीक्षणों की खबर लगी तो उसके होश उड़ गए। 
 

 

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अमेरिका की खुफिया एजेंसी के साथ ऐसा होने के पीछे एक विशेष वजह भी है। वह भारत के परमाणु परीक्षणों पर लगातार नजर रख रही थी और उसे 1995 में भारत की इस प्रकार की गतिविधियों के संकेत भी मिले थे। हालांकि उसे सैटेलाइट की तस्वीरों में भारत की तैयारियां स्पष्ट रूप से नजर नहीं आई थीं। इस साल फरवरी में जारी हुए नेशनल सेक्युरिटी आर्काइव के दस्तावेजों में भारतीय परमाणु परीक्षण स्थल पर अमेरिका की नजर के संकेत मिले थे। आर्काइव के दस्तावेजों पर गौर करें तो अमेरिका की खुफिया एजेंसियों के अधिकारियों ने माना था कि भारत ने बहुत ही सावधानी से साल 1998 में 11-13 मई के दौरान परमाणु परीक्षणों के अभियान 'ऑफरेशन शक्ति' को अंजाम दिया था। 
 
 
 

 

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न्यूयॉर्क टाइम्स की खबर ने सीआइए को दी मात  
 
मई, 1998 में भारत के परमाणु परीक्षणों की खबर नहीं लग पाने के लिए अमेरिका की खुफिया एजेंसी सीआइए के वरिष्ठ अधिकारियों समेत सैन्य अधिकारियों ने न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट को जिम्मेदार बताया था। भारत के परमाणु परीक्षणों से पहले न्यूयॉर्क टाइम्स ने 14 दिसंबर, 1995 को खबर प्रकाशित की थी कि अमेरिका की जासूसी सैटेलाइट्स भारत के परमाणु परीक्षणों वाले स्थानों की निगरानी कर रहे हैं। 
 
 
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अखबार ने अमेरिकी खुफिया एजेंसी के एक वरिष्ठ अधिकारी के हवाले से यह खबर प्रकाशित की थी। अधिकारी ने उसे बताया था कि खुफिया सैटेलाइटों ने भारत के पश्चिमी भाग में ऐसी गतिविधियों को दर्ज किया है जो बताती हैं कि भारत परमाणु परीक्षण कर सकता है। हालांकि उस समय भारत ने न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट को पूरी तरह से काल्पनिक बताया था। 
 
 

 

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भारत के परमाणु परीक्षणों के बाद सीआइए के अधिकारियों ने कहा था कि न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के बाद भारत ने 1996 में अपने परमाणु परीक्षण हथियारों को भूमिगत कर लिया था। इसकी वजह से उन्हें उसकी योजना की खबर नहीं लग पाई थी। अमेरिकी खुफिया एजेंसी के एक अधिकारी ने कहा था, 'एक खुलासा था। हम इसकी प्रतिक्रिया को जानते थे और वैसा ही हुआ। हमने देखा था कि उन्होंने परमाणु परीक्षण हथियारों को भूमिगत कर रहा है। हमने तभी चेताया था कि भारत बहुत ही जल्द परमाणु परीक्षण कर सकता है।'  
 
 
 

 

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धमाकों के 12 घंटे बाद अमेरिका कर पाया परमाणु परीक्षणों की पुष्टि
 
भारत के 'ऑपरेशन शक्ति' की खबर की पुष्टि अमेरिका 12 घंटे तक नहीं कर पाया। अमेरिका के तत्कालीन राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार सैंडी बर्गर ने उस समय संवाददाताओं से कहा था कि धमाकों के बाद करीब 12 घंटे तक अमेरिका परमाणु परीक्षणों की पुष्टि नहीं कर पाया था। 
 
 

 

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उन्होंने कहा था कि भारत ने अमेरिकी खुफिया सैटेलाइटों की कक्षा का आकलन कर लिया था। इसके बाद उसने परमाणु परीक्षण यंत्रों को वहां से हटा दिया। अधिकारियों ने यह पाया था कि भारत के पास अंतरिक्ष से जुड़े कई कार्यक्रम हैं और वह सैटेलाइट की कक्षा का पता लगाने में सक्षम है। 
 
 

 

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तीसरी दुनिया के देशों में सबसे छिपाऊ देश बना था भारत
 
'ऑपरेशन शक्ति' के बाद अमेरिकी खुफिया एजेंसी सीआइए के एक वरिष्ठ अधिकारी ने भारत को तीसरी दुनिया के देशों में सबसे छिपाऊ देश करार दिया था। उसने कहा था कि वे हमारी नजरों से दूर थे। भारत का परमाणु हथियार कार्यक्रम तीसरी दुनिया के सभी देशों में सबसे अधिक रहस्यात्मक थे। हम भारत के परमाणु कार्यक्रम से अधिक उत्तरी कोरिया के परमाणु परीक्षण कार्यक्रमों के बारे में जानते हैं। 
 
 

 

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इन खासियत की वजह से भारत ने दुनिया को दी मात
 
भारत खुद की सैटेलाइट छवि को हासिल करने में सक्षम है। इससे यह पता चल जाता है कि अंतरिक्ष से क्या देखा जा सकता है और क्या नहीं देखा जा सकता। भारत का परमाणु परीक्षण कार्यक्रम उसकी सैन्य व्यवस्था से भी अलग रखा जाता है। बहुत से कार्यक्रमों से अलग भारत इसके लिए किसी बाहरी सहायता पर निर्भर नहीं है। भारत के पास प्रशिक्षित वैज्ञानिकों और इलेक्ट्रिकल इंजीनियरों की फौज है। इतना ही नहीं उसके पास महत्वपूर्ण उपकरणों के उत्पादन के लिए औद्योगिक अवसंरचना भी उपलब्ध है। भारत ने देश से जासूसों की भर्ती करने के लिए पश्चिमी खुफिया एजेंसियों को प्रतिबंधित कर दिया है। इसमें सतर्कता और राजनयिकों व संदिग्ध एजेंटों की भर्ती का प्रयास भी शामिल है। 
 
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