सपा, समता और सियासी समीकरण

9 वर्ष पहले
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जयपुर। पदोन्नति में आरक्षण समाप्त करने वाले उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव का शनिवार को यहां अमरूदों का बाग में समता आंदोलन समिति की ओर से अभिनंदन रैली में सम्मान किया जाएगा। माना जा रहा है रैली प्रदेश की राजनीति को प्रभावित करेगी। एक तरफ आरक्षण के खिलाफ आंदोलन करने वाले कर्मचारी इसे अपने शक्ति-प्रदर्शन के रूप में देख रहे हैं, दूसरी तरफ अखिलेश की समाजवादी पार्टी (सपा) राजस्थान में चुनाव के लिए अपनी जमीन तलाशने का प्रयास करेगी। रैली का प्रदेश में भाजपा-कांग्रेस पर भी असर पडऩे की संभावना है।


प्रदेश की राजनीति पर संभावित असर


पदोन्नति में आरक्षण की व्यवस्था से प्रदेश के 72 फीसदी सवर्ण कर्मचारी यानी 5 लाख से अधिक परिवार प्रभावित होते हैं। भाजपा के वोट बैंक में सवर्णों की संख्या अधिक है। अगर सपा विधानसभा चुनाव में उतरती है तो सवर्णों का झुकाव उधर होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता क्योंकि एक तो राजस्थान में पदोन्नति में आरक्षण की व्यवस्था, दूसरा केंद्र में पदोन्नति में आरक्षण बिल का समर्थन करने की भाजपा की घोषणा से इस वर्ग में नाराजगी देखी गई है।

हालांकि भाजपा के वरिष्ठ नेता हरिशंकर भाभड़ा का मानना है कि कोई असर नहीं होगा, क्योंकि सपा का जातिगत आधार अलग रूप में है। कांग्रेस और सपा के वोट बैंक में एक समानता है-अल्पसंख्यक, एससी-एसटी और ओबीसी। अगर सपा चुनाव में उतरती है तो कहा जा सकता है कि कांग्रेस के इस वोट बैंक में सेंध लग सकती है। पूर्व विधानसभा अध्यक्ष सुमित्रा सिंह का मानना है कि इस रैली का भाजपा के सवर्ण वोटों पर असर पडऩे से इनकार नहीं किया जा सकता। मुस्लिम-यादव भी सपा की तरफ झुक सकते हैं।

यादव बहुल इलाके

मुंडावर, बहरोड़, बानसूर, तिजारा, अलवर शहर, अलवर ग्रामीण, किशनगढ़बास। डीग कुम्हेर, कामां, कोटपूतली, आमेर, विराटनगर, शाहपुरा, धौलपुर भी यादव बहुल। यूपी से सटे धौलपुर और भरतपुर जिलों की राजनीति पर भी यूपी का सीधा असर दिखाई देता है। अखिलेश धौलपुर आए भी थे।

प्रदेश में पदोन्नति में आरक्षण


प्रदेश में सरकारी भर्ती के साथ पदोन्नति में भी एससी को 16' और एसटी को 12' आरक्षण का प्रावधान है। इससे वरिष्ठता और अनारक्षित वर्ग की सीटों के भी प्रभावित होने पर राज्य कर्मियों ने इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट तक 17 साल तक कानूनी लड़ाई लड़ी। फिर भी पदोन्नति में 16 और 12' आरक्षण जारी रहा, क्योंकि मुख्यमंत्री अशोक गहलोत सहित अन्य नेता आरक्षित वर्ग के पक्ष में खड़े हो गए थे।