विधानसभा चुनाव महाकवरेज: यहां जाति ही जीत का फैक्टर

9 वर्ष पहले
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जयपुर. 4 जिले, 17 विधानसभा सीटें। लगभग सब पर एक ही मुद्दा-जातिवाद। बाकी सब गौण। दौसा, करौली, सवाई माधोपुर और टोंक की ये सीटें मीणा, गुर्जर और दलित बहुल हैं। इस कारण जातीय धु्रवीकरण ही चुनाव की दिशा तय करेगा। पिछले विधानसभा चुनावों पर नजर डालें तो हुआ भी ऐसा ही है। दौसा सांसद किरोड़ीलाल मीणा भी संगमा की पार्टी राष्ट्रीय जनता पार्टी (राजपा) को प्रदेश में लाकर चुनाव मैदान में डटे हैं। राजपा की रणनीति भाजपा और कांग्रेस के बागियों को टिकट देने की है। यह रणनीति भांपकर भाजपा और कांग्रेस दोनों ने ही टिकट के लिए फिलहाल कोई नाम तय नहीं किए हैं। कुल मिलाकर राजपा किसी न किसी तरीके से कांग्रेस और भाजपा के सियासी समीकरण बिगाड़ेगी।

2008 के चुनाव में किरोड़ीलाल मीणा ने भाजपा छोड़कर निर्दलीय के रूप में चुनाव लड़ा और पूर्वी राजस्थान में जातिगत वोटों का ध्रुवीकरण किया।

कई जगह उन्होंने बसपा, निर्दलीय और कांग्रेस के पक्ष में वोट ट्रांसफर करवाए। इस बार हालात उलट हैं। किरोड़ी मीणा चाहेंगे वोट किसी पार्टी को ट्रांसफर होने के बजाय उनकी पार्टी के उम्मीदवारों के खाते में जाएं। दूसरी ओर, भाजपा को यह डर तो है ही कि किरोड़ी उसके वोटों में सेंध लगाएंगे, साथ ही मजबूत उम्मीदवारों के चयन की चुनौती भी है।

कांग्रेस की हालत अलग तरह की है। बसपा से कांग्रेस में आए मुरारी, रामकेश व रमेश मीणा और निर्दलीय रामकिशोर टिकट के लिए दावा कर रहे हैं। हालांकि, स्थानीय स्तर पर कांग्रेस का एक बड़ा तबका इन्हें टिकट देने का विरोध कर रहा है। कांग्रेस दुविधा में है कि इनका टिकट काटा तो भी ये बागी चुनाव लड़ेंगे और टिकट दिया तो कार्यकर्ताओं की नाराजगी से भितरघात का खतरा है।

ग्राउंड रिपोर्ट टिकट बंटवारे से पहले यूं समझिए चुनावी समीकरण...

दौसा: जातीय धु्रवीकरण

दौसा : मौजूदा विधायक : मुरारीलाल मीणा (बसपा, अब कांग्रेस में)
पिछली बार हारे : रामावतार चौधरी (कांग्रेस)

दौसा में जातीय पंचायतों के फरमान चुनाव की दिशा तय करेंगे। गुर्जर व सवर्ण जातियां लामबंद हो रही हैं। मौजूदा विधायक मुरारीलाल मीणा को पिछली बार किरोड़ी मीणा का समर्थन मिला था। अब इनके बीच दूरियां हैं। किरोड़ी अपनी पार्टी राजपा से प्रत्याशी उतारेंगे।

बांदीकुई : मौजूदा विधायक : रामकिशोर सैनी (निर्दलीय)
पिछली बार हारे : शैलेंद्र जोशी (भाजपा)

बांदीकुई में भी जातीय गणित हावी रहेगा। पिछली बार रामकिशोर सैनी दलित व एसटी वोटों के उनके पक्ष में आने और अन्य वोटों के भाजपा, बसपा और कांग्रेस में बंटने के कारण जीते थे। इस बार हालात बदले हुए हैं। सैनी का उन्हीं की जाति में एक बड़ा धड़ा विरोध में है।

सिकराय : मौजूदा विधायक : ममता भूपेश (कांग्रेस)
पिछली बार हारे : गीता वर्मा (भाजपा)

पिछली बार यहां गुर्जर वोट लोसप प्रत्याशी के पक्ष में गए थे और मीणा वोटों का ममता के पक्ष में ध्रुवीकरण हुआ था। इस बार स्थिति उलट है। राजपा यहां से अपना प्रत्याशी उतार रही है। ऐसे में कांग्रेस का एक बड़ा वोट बैंक उसके हाथ से जाएगा।


महवा : मौजूदा विधायक : गोलमा देवी (निर्दलीय)
पिछली बार हारे : विजय शंकर (बसपा)

मीणा, गुर्जर व माली बहुल इस सीट पर त्रिकोणीय मुकाबला तय है। सवर्ण वोट भी दिशा तय करेंगे। इसी क्षेत्र में किरोड़ी मीणा का गांव नांगलखोरा है। उनकी पत्नी गोलमा ने फिर यहीं से चुनाव लड़ा तो जीत का मसला अस्तित्व की लड़ाई से जुड़ा होगा।


लालसोट : मौजूदा विधायक : परसादी लाल मीणा (निर्दलीय)
पिछली बार हारे : बाबूलाल धानका (सपा)

राजपा के आने से इस बार राजनीतिक समीकरण बदल गए हैं। यहां किरोड़ीलाल मीणा या गोलमा में से किसी एक के चुनाव लडऩे की चर्चा है। यहां मीणा वोटों का बंटना तय माना जा रहा है। पिछली बार ऐनवक्तपर मीणा वोटों के ध्रुवीकरण के चलते परसादीलाल जीते थे।

स.माधोपुर: जाति के साथ क्षेत्र भी मुद्दा
स.माधोपुर : मौजूदा विधायक : अलाउद्दीन (कांग्रेस) पिछली बार हारे : डॉ. किरोड़ीलाल मीणा (निर्दलीय)
सूरवाल कांड के बाद मुस्लिम व मीणा के बीच खाई बढ़ी है। गुर्जर वोटों का रुख अभी तय नहीं है, लेकिन यह कांग्रेस व राजपा में जाता नहीं दिख रहा। भाजपा में अभी गैर विवादित और मजबूत उम्मीदवार नहीं है, वहीं कांग्रेस में बिखराव है। राजपा के आने से दोनों पार्टियों के समीकरण गड़बड़ाए हैं।

गंगापुर : मौजूदा विधायक : रामकेश मीणा (बसपा,
अब कांग्रेस में) पिछली बार हारे : मानसिंह गुर्जर (भाजपा)


पिछले चुनाव में रामकेश अकेले मीणा प्रत्याशी होने से उन्हें जातीय वोटों का फायदा मिला। इस बार हालात अलग हैं। बसपा छोडऩे से दलित नाराज हैं। पिछली बार समर्थन देने वाले किरोड़ी अपना प्रत्याशी उतारेंगे। रामकेश कांग्रेस से टिकट मांग रहे हैं तो बड़ा तबका उनके खिलाफ है।


बामनवास : मौजूदा विधायक : नवलकिशोर मीणा (कांग्रेस) पिछली बार हारे : संपतलाल (लोसपा)

इस सीट पर बामनवास और बोली क्षेत्र का मुद्दा हावी है। यहां से बामनवास क्षेत्र का विधायक बनता रहा है। बौली के लोग अपने क्षेत्र का विधायक चाहते हैं जहां किरोड़ी मीणा का प्रभाव है। उनकी पार्टी राजपा प्रत्याशी भी कांग्रेस-भाजपा के समीकरण बिगाड़ेगा।


खंडार : मौजूदा विधायक : अशोक बैरवा (कांग्रेस) पिछली बार हारे : हरिनारायण (भाजपा)
बैरवा लगातार तीन बार जीत चुके हैं। राजपा के चुनावी मैदान में उतरने से यहां त्रिकोणीय मुकाबला होगा। राजपा फैक्टर से कांग्रेस को मीणा वोटों का नुकसान उठाना पड़ सकता है, वहीं भाजपा जिताऊ प्रत्याशी को तलाश रही है। यहां जब-जब त्रिकोणीय मुकाबला हुआ है, भाजपा को फायदा हुआ है।


करौली: गोत्र से हार-जीत

करौली : मौजूदा विधायक : रोहिणी कुमारी (भाजपा)
पिछली बार हारे : दर्शन सिंह (बसपा)

इस सीट पर शहरी इलाके में मोदी फैक्टर तो ग्रामीण इलाकों में जातीय ध्रुवीकरण हावी रहेगा। राजपा ने लाखन सिंह कटकड़ को तथा बसपा ने पूर्व विधायक सुरेश मीणा को टिकट दिया है। इससे मीणा वोटों का ध्रुवीकरण होना तय है। बसपा का फैक्टर अभी तक ज्यादा हावी नहीं है क्योंकि बसपा विधायकों के कांग्रेस में जाने से दलित मतदाताओं का भरोसा अपेक्षाकृत कम हुआ है।


सपोटरा : मौजूदा विधायक : रमेश मीणा (बसपा, अब कांग्रेस में)
पिछली बार हारे : मुखराज (कांग्रेस)

मीणा बहुल इस सीट पर जाति से भी आगे बढ़कर गोत्रों का ध्रुवीकरण है। पिछली बार कांग्रेस और भाजपा ने टाटू गोत्र के उम्मीदवारों को टिकट दिया था। इससे बाकी गोत्र खिलाफ हो गए। मंडरायल क्षेत्र के बडग़ोत्या गोत्र के मीणा हर चुनाव में फरमान जारी करते हैं, जो परिणाम तय करने में महती भूमिका निभाता है। इस सीट पर राजपा ने मुकाबला त्रिकोणीय बना दिया है। इस मुकाबले में अब दलित और सवर्ण मतदाताओं का रुझान परिणाम की दिशा तय करेगा।


टोडाभीम : मौजूदा विधायक : रमेश मीणा (भाजपा, उपचुनाव में जीते)
पिछली बार हारे : शिव दयाल (कांग्रेस)

2008 के चुनाव में डॉ. किरोड़ीलाल मीणा 33,912 वोटों से जीते, इसके बाद सांसद बनने से इस्तीफा दे दिया। मीणा वोटों के बाद यहां एससी वोट सबसे अधिक हैं। क्षेत्रवाद का मुद्दा उपचुनाव में चला था, जिसमें नादौती क्षेत्र रमेश मीणा के समर्थन में लामबंद हुआ, यह मुद्दा अब भी कायम है। कांग्रेस के पास यहां मजबूत उम्मीदवार नहीं है।


हिंडौन : मौजूदा विधायक : भरोसीलाल जाटव (कांग्रेस)
पिछली बार हारे : राजकुमारी (भाजपा)

हिंडौन में मौजूदा कांग्रेस विधायक भरोसीलाल जाटव का बड़ा तबका विरोध कर रहा है। यहां गुर्जर व जाट निर्णायक भूमिका में हैं, जो उनके खिलाफत कर रहे हैं। पिछली बार खेड़ली में हुई अभद्रता की घटना के बाद मीणा वोट भरोसी के पक्ष में गए थे व किरोड़ी मीणा ने समर्थन किया था। इस बार राजपा के खुद उम्मीदवार उतार रही है।

टोंक: विधायकों से नाराज वोटर
टोंक : मौजूदा विधायक : जकिया (कांग्रेस) पिछली बार हारे : महावीर प्रसाद जैन (भाजपा)

इस सीट पर गुर्जर वोट दिशा तय करेंगे। पिछली बार गुर्जर वोट बसपा में जाने से भाजपा को नुकसान हुआ था। इस बार कांग्रेस को आपसी फूट का नुकसान हो सकता है। इस सीट पर बदलाव का ट्रेंड रहा है। यहां गुर्जरों का रुझान कर्नल किरोड़ी सिंह बैसला के इशारे से तय होगा।

निवाई : मौजूदा विधायक : कमल बैरवा (कांग्रेस) पिछली बार हारे : सतीश चंदेल (भाजपा)
मौजूदा विधायक के प्रति दो अलग-अलग घटनाओं को लेकर ब्राह्मण समाज और उनकी खुद की जाति का एक बड़ा तबका नाराज है। नाराज धड़ा कांग्रेस के लिए मुश्किलें पैदा कर सकता है। भाजपा यहां इस नाराजगी का फायदा उठाने के लिए मजबूत उम्मीदवार तलाश रही है।

मालपुरा : मौजूदा विधायक : रणवीर पहलवाल (निर्दलीय) पिछली बार हारे : डॉ. चंद्रभान (कांग्रेस)
मालपुरा में भाजपा के स्थानीय नेताओं ने बाहरी उम्मीदवार को टिकट नहीं देने का मुद्दा उठा रखा है। कांग्रेस में भी यही मुद्दा हावी है। जाट और गुर्जर वोटों का ध्रुवीकरण यहां परिणाम की दिशा तय करेगा, जो एक-दूसरे के खिलाफ वोट डालते हैं।

देवली-उनियारा : मौजूदा विधायक : रामनारायण मीणा (कांग्रेस) पिछली बार हारे : डॉ. नाथूसिंह गुर्जर (भाजपा)

मौजूदा विधायक मीणा का उनकी ही पार्टी में एक बड़ा धड़ा स्थानीय कार्यकर्ताओं की उपेक्षा का आरोप लगाते हुए विरोध कर रहा है। यहां राजपा भी अपना उम्मीदवार उतारेगी। भाजपा यहां पूर्व मंत्री दिग्विजय सिंह के परिवार में से किसी को टिकट दे सकती है।

सियासी गुणा-भाग
आंकड़े 2013 विधानसभा चुनाव के

अधिकतम वोटर 2,29,869 देवली-उनियारा

न्यूनतम 167604 महवा


आंकड़े 2008 विधानसभा चुनाव के

सबसे ज्यादा उम्मीदवार 18
गंगापुर


सबसे कम 5
सिकराय


सबसे बड़ी जीत
डॉ. किरोड़ीलाल मीणा वोट 33,912


सबसे कम अंतर
मुरारीलाल मीणा
वोट 1102

50 शिकायतें दर्ज हुईं आचार संहिता उल्लंधन की दौसा में
करौली 12
स.माधोपुर 3
टोंक 8

1886 मतदान केंद्र संवेदनशील घोषित थे

दौसा 617

करौली 588
स.माधोपुर 332
टोंक 349

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