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2250 करोड़ में फिर होंगे टेंडर, पिछली सरकार में हुए 2400 करोड़ के टेंडर नई में रद्द

8 वर्ष पहले
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जयपुर। पिछली सरकार द्वारा अंतिम दिनों में किए पेयजल, सीवरेज और आधारभूत सुविधाओं से जुड़े 2400 करोड़ रुपए के टेंडर नई सरकार के आते ही गुपचुप निरस्त कर दिए गए थे। अब उनकी 2250 करोड़ की प्रशासनिक स्वीकृति मिलने के बाद गुरुवार या एक-दो दिन में नए सिरे से टेंडर जारी किए जाएंगे।

पिछली सरकार के समय बीएसआर रेट से 40 फीसदी अधिक दर पर टेंडर जारी कर दिए थे। इस पर भ्रष्टाचार के आरोप लगे थे। नई सरकार में फाइल मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के पास गई थी। उसी दिन 22 दिसंबर को ही गुपचुप पिछले टेंडर निरस्त कर दिए गए थे।

जयपुर सहित प्रदेश के 19 शहरों में सीवरेज और पेयजल के 37 प्रोजेक्ट्स के टेंडर पिछली सरकार के समय 2400 करोड़ रुपए में जारी किए गए थे। नई सरकार में नगरीय विकास विभाग ने निर्णय किया कि मुख्यमंत्री से निर्देश लेकर नई टेंडर प्रक्रिया के तहत ग्लोबल टेंडर जारी किए जाएंगे। इससे टेंडर प्रक्रिया पारदर्शी रहेगी, लेकिन एक दो दिन में जारी किए जा रहे नए टेंडर को भी ग्लोबल नहीं बनाया गया है।

जयपुर में 542 किमी लंबी सीवर लाइन डलेगी, बनेंगे 14 ट्रीटमेंट प्लांट
नई प्रक्रिया के अनुसार जयपुर में चार बड़ प्रोजेक्ट के तहत 398 करोड़ रुपए के कार्यों के टेंडर जारी किए जाएंगे। इसमें पुरानी सीवर लाइनों के सहारे एक से दो मिलियन लीटर डेली क्षमता के सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट बनाए जाएंगे। नई सीवर लाइनों के सहारे 8 से 20 एमएलडी क्षमता के सात सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट बनाए जाएंगे। इन प्लांट की कुल क्षमता 62 एमएलडी होगी। इनकी लागत कुल 82 करोड़ रुपए आएगी।

इसी तरह भडारना-हरमाड़ा क्षेत्री की कॉलोनियों, लोहामंडी के पास की कॉलोनियों,पालड़ीमीणा जेडीए कॉलोनी से जुड़ी कॉलोनियां, गोविंदपुरा-बक्सावाला क्षेत्र, जगतपुरा सेक्टर 36-37 की वंचित कॉलोनियां, मुहाना मंडी से पहले दादूदयाल नगर और आस पास की कॉलोनियों और मदरामपुरा क्षेत्र की कॉलोनियों में नई 542 किलोमीटर लंबी सीवर लाइनें डाली जाएंगी। इनको तीन प्रोजेक्ट में बांटा गया है।


बड़ी निविदा जारी कर बाहरी ठेकेदारों को लाभ पहुंचाने का आरोप
जेडीए कॉट्रेक्टर एसोसिएशन ने मुख्यमंत्री के अध्यक्ष राजकुमार गोयल ने मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजकर 2250करोड़ के टेंडरों में निविदाओं का आकार छोटा करने और नए नियमों में शिथिलता देने की मांग की है। उनका आरोप है कि 100 करोड़ रुपए या इससे अधिक की राशि के सीवर पैकेज तैयार किए गए हैं। इसके लिए राज्य का कोई ठेकेदार पात्र नहीं है। यहां के ठेकेदार बीएसआर से 10-12 फीसदी ज्यादा दर पर कार्य को तैयार हंै, लेकिन विभाग बाहरी बड़े ठेकेदारों को 40 फीसदी ज्यादा दर पर ठेका देने पर अड़े हैं। जॉइंट वेंचर का नियम भी जोडऩे की मांग की है।