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'वैट घटाने में सरकार ने बोला झूठ'

9 वर्ष पहले
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जयपुर। भाजपा ने सोमवार को विधानसभा में महंगाई का मुद्दा उठाते हुए कहा कि तेल कंपनियां डीजल पर हर साल 94 हजार करोड़ रु. और पेट्रोल पर 45 हजार करोड़ रु. का घाटा बताकर लगातार कीमतें बढ़ा रही हैं।

इसी की आड़ में सरकार ने उन्हें 38 हजार 500 करोड़ रु. की सब्सिडी भी दे दी।


शून्यकाल में विधायक राजेंद्र राठौड़ ने 2011-12 जुलाई, अगस्त और सितंबर के नेट पर आंकड़े पेश करते हुए कहा कि इंडियन ऑयल 9617 करोड़, भारत पेट्रोलियम 5 हजार करोड़ और हिंदुस्तान पेट्रोलियम 2327 करोड़ रु. के लाभ में रहे। ये कंपनियां और सरकार लगातार झूठ बोल रही हैं। घाटा पूरा करने के नाम पर पेट्रोल-डीजल की कीमत बढ़ाकर जनता पर बोझ डाला जा रहा है।


राठौड़ ने कहा कि कांग्रेस ने अपने घोषणा पत्र में पेट्रोल-डीजल पर वैट कम करने का वादा किया था, लेकिन आज राजस्थान सबसे ज्यादा वैट वसूलने वाले देश के चार राज्यों में शुमार है।


केंद्र सरकार की एम्पावर्ड कमेटी ने वैट की न्यूनतम दर 20 प्रतिशत करने का सुझाव दिया है। ऐसा होते ही डीजल पर वैट 20 प्रतिशत हो जाएगा, जिससे फल-सब्जी और भाड़ा 10 प्रतिशत ज्यादा महंगा हो जाएगा।


तीन पड़ोसी राज्यों दिल्ली, पंजाब और हरियाणा की तुलना में पेट्रोल और डीजल पर राजस्थान में वैट ज्यादा है। डीजल पर पड़ोसी राज्यों से दुगुना वैट होने की वजह से हरियाणा और पंजाब से हर साल 200 करोड़ रु. का डीजल तस्करी के जरिए राजस्थान आ रहा है। इससे राज्य सरकार को 500 करोड़ रु. का नुकसान हो रहा है। वर्ष 2012- 13 में पेट्रोल-डीजल पर वैट से राज्य सरकार को 5 हजार करोड़ रु. की आय हुई है।


वर्ष 2010-11 में कुल राजस्व 12700 करोड़ रु. था, जिसमें से पेट्रोलियम पदार्थों पर वैट का हिस्सा 3928.12 करोड़ रु. रहा। यानी कुल राजस्व का 26 प्रतिशत टैक्स।


वैट : पड़ोसी राज्यों से तुलना
राज्य पेट्रोल डीजल
दिल्ली 12.5' 13.29'
पंजाब 9.08' 8.25'
हरियाणा 9.24' 8.80'
राजस्थान 26' 18'