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फेसबुक पर आया पोस्ट: सत्ता लोलुपो सावधान, परशुराम का अवतार हो रहा है

8 वर्ष पहले
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जयपुर। पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे की सुराज यात्रा में शामिल नहीं होने वाले भाजपा नेता और पूर्व मंत्री घनश्याम तिवाड़ी इन दिनों भले ही सक्रिय नहीं आते हों, लेकिन फेसबुक पर राजनीतिक विरोधियों पर निशाना साधने से नहीं चूक रहे।
उन्होंने कहा, सावधान, ले रहा परशु धर, फिर नवीन अवतार! उन्होंने चेतावनी दी, जब सत्ता लोलुप शक्तियां, सत्य-निष्ठा को कुचलने का प्रयास करती हैं तो परशुराम का जन्म होता है। तिवाड़ी की इस पोस्ट पर 99 से अधिक लोगों ने कमेंट्स किए और उनके पेज को 36,645 लोगों ने लाइक किया। अटल बिहारी वाजपेयी की रचित कौरव कौन, कौन पांडव कविता भी तिवाड़ी ने पोस्ट की है। इसमें उन्होंने लिखा कि बिना कृष्ण के आज, महाभारत होना है, कोई राजा बने, रंक को तो रोना है।
अकेले चलना पड़ा तो भी चलूंगा
सत्य के लिए अकेला ही चलना पड़े
(जो होता ही है) तो अकेले ही चलो।
केवल अकेले ही बोलने वाले रह जाओ
तो भी सत्य के लिए बोलते रहो।
-रवींद्रनाथ ठाकुर
सियासी अर्थ ये : लोग सोच रहे हैं कि तिवाड़ी अकेले पड़ गए और अब लौट ही आएंगे तो यह उनकी गलत फहमी है। वे अकेले ही अपना संघर्ष करते रहेंगे।
सावधान, ले रहा परशु धर- फिर नवीन अवतार
सत्ता लोलुप शक्तियां जब सत्य निष्ठा को
कुचलने का प्रयास करती हैं तो
परशुराम का जन्म होता है। सावधान?
ले रहा परशु धर- फिर नवीन अवतार।
मुख में वेद, पीठ पर तर कस
कटि में कठिन कुठार
सावधान? ले रहा परशु धर, फिर नवीन अवतार!
सियासी अर्थ ये : तिवाड़ी अपने मुद्दों को शुरू से श्रेष्ठ बताते रहे हैं और अब भी वे यही कह रहे हैं। उन्होंने नया सवाल ये उठाया कि उनकी राजनीति अब कोई नया स्वरूप ले सकती है।
ये शब्द मूलत: रामधारीसिंह दिनकर की कविता के हैं, लेकिन तिवाड़ी ने इन्हें सियासी अर्थो में इस्तेमाल किया। इससे पहले भी वे खुले में कह चुके हैं कि राज्य के संसाधनों को को लूटने के लिए कुछ लोग अभी से सौदेबाजी शुरू कर चुके हैं। उनका यह जुमला कांग्रेस की सभाओं में खूब गूंज रहा है।
कोई राजा बने, रंक को तो रोना है
कौरव कौन कौन पांडव
कौरव कौन
कौन पांडव
टेढ़ा सवाल है
दोनों ओर शकुनि
का फैला
कूट जाल है
बिना कृष्ण के
आज
महाभारत होना है
कोई राजा बने,
रंक को तो रोना है
- अटल बिहारी वाजपेयी
सियासी अर्थ ये : उन्होंने साफ कह दिया है कि सियासत के इस महाभारत में दोनों तरफ शकुनि और कौरव हैं। इसलिए वे कोई तीसरा रास्ता भी देख सकते हैं।