जयपुर। राज्य सेवाओं के अधिकारियों के लिए अखिल भारतीय सेवाओं में पदोन्नति लिखित परीक्षा और इंटरव्यू के बाद ही होगी। केंद्र सरकार इसे जल्द ही लागू करने जा रही है। आरएएस से आईएएस, आरपीएस से आईपीएस और आरएफएस से आईएफएस बनने के लिए कई औपचारिकताओं से गुजरना होगा।
अब सर्विस रिकॉर्ड और वरिष्ठता के मापदंड भी आंके जाएंगे। डीओपीटी ने इस आशय का प्रस्ताव राज्यों के मुख्य सचिवों और कार्मिक विभाग के प्रमुख सचिवों को भेजा है। राजस्थान के मुख्य सचिव सी.के. मैथ्यू ने बताया कि वर्तमान पैटर्न ठीक रहता है या परीक्षा वाला, इसकी जांच-पड़ताल और राय मशविरा के बाद ही राज्य की ओर से राय व सुझाव भेजा जाएगा।
ऐसे होगा चयन
चयन प्रक्रिया के लिए 1000 अंक तय किए जाएंगे। इनमें से 400 अंक लिखित परीक्षा के होंगे। इसमें पहले पेपर में 100 अंक एप्टीट्यूड टेस्ट और 100 अंक जनरल स्टडीज के होंगे। दूसरे में 40 अंकों के स्टेट स्पेसिफिक क्वेश्चन और 160 अंकों के सर्विस स्पेसिफिक क्वेश्चन होंगे। वरिष्ठता आंकलन के 200, आठ साल की सेवा के बाद के प्रत्येक साल के लिए 10, सर्विस रिकॉर्ड आंकलन के 250 अंक होंगे। इसमें एसीआर में आउटस्टैंडिंग, वेरी गुड और गुड के अलग-अलग अंक
दिए जाएंगे। मुख्य सचिव की अध्यक्षता में गठित कमेटी अंक का निर्धारण करेगी। 150 अंक इंटरव्यू के होंगे। पदोन्नति से चयन के जितने पद होंगे, उसके मुकाबले 5 गुणा तक अधिकारी आवेदन कर सकेंगे।
अभी क्या है व्यवस्था
अभी राज्य सेवा के अधिकारियों की वरिष्ठता क्रम को ही तरजीह दी जाती है। साथ में अधिकारी की एसीआर देखी जाती है। इसमें तीन साल से अधिक बार एसीआर में आउटस्टैंडिंग, वेरी गुड या गुड होना जरूरी होता है। प्रदेश में 17 साल के बाद हुई आरएएस से आईएएस बनाने में भी इसी फार्मूले का उपयोग किया गया है।
क्या होगा असर
राज्य सेवाओं में सभी पदोन्नतियां कई प्रकार की जांचों के बाद ही होती है। अब अगर परीक्षा की पैटर्न अपनाया जाता है तो और भी अधिक होशियार अफसर मिल सकेंगे। वहीं दूसरी तरफ, कई वरिष्ठ अधिकारियों के पदोन्नति से वंचित होने का अंदेशा रहेगा।