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देश की आजादी के लिए सबकुछ झोंका, जमीन के टुकड़े के लिए करना पड़ा 51 साल इंतजार

8 वर्ष पहले
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जयपुर। आजाद हिंद फौज में कैप्टन रह चुके स्वतंत्रता सेनानी विश्वेश्वर लाल शर्मा को तब देश को आजाद कराने से कई गुणा ज्यादा संघर्ष सरकारी तंत्र से करना पड़ा। सरकार ने ही सांगानेर स्टेडियम के लिए उनसे जमीन ली थी, लेकिन उनकी जमीन के बदले जमीन नहीं दी।
2004 में जमीन तो मिल गई, लेकिन उसका पट्टा अटका दिया गया। पट्टे के लिए संघर्ष करते हुए अंतत: वर्ष 2008 में सांगानेर निवासी विश्वेश्वर लाल का निधन हो गया। संघर्ष जारी रहा। बेटे ने कमान संभाली। आखिर 51 साल के इंतजार के बाद अब जेडीए के अनापत्ति प्रमाण पत्र के बाद नगर निगम ने उनके पुत्र दिनेश लाल शर्मा और पुत्रवधु रुक्मणीदेवी के नाम पट्टा जारी किया है।
दिनेश लाल कहते हैं सरकार ने प्रशासन शहरों के संग अभियान चलाया और स्वायत्त शासन विभाग ने सहयोग किया, तब कहीं जाकर 51 साल बाद पट्टा मिला। विश्वेश्वर लाल शर्मा से 1963 में सांगानेर ग्राम पंचायत ने सरकार के आदेश से स्टेडियम के लिए जमीन ली।
उसके बदले जमीन नहीं दी। अपनी जमीन के लिए वे साढ़े चार दशक तक नगरीय निकायों के चक्कर काटते रहे। उनको कभी कहा जाता कि जमीन का स्थान तय नहीं हुआ तो कभी कहा गया कि फाइल ही नहीं मिल रही। आखिर 2004 में उनको तत्कालीन सांगानेर कमिश्नर ने जमीन तो दे दी, लेकिन कुछ हिस्सा जेडीए के अधीन होने के कारण पट्टा अटक गया। दिनेश लाल बताते हैं कि 8 साल वे कभी जेडीए तो कभी निगम के चक्कर काट रहे थे।