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वेस्ट वाटर से उगाएंगे फल, फूल और सब्जियां

8 वर्ष पहले
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जयपुर। सूखे और शहरी इलाकों में अब वेस्ट वाटर से जल्द ही फल और सब्जियों का उत्पादन होगा। इसके लिए इजरायल की तर्ज पर वेस्ट पानी को ट्रीटमेंट प्लांटों से शुद्ध करके फल, फूल और सब्जियां उगाने का नया प्रोजेक्ट तैयार होगा। अकेले जयपुर में डेढ़ लाख मीट्रिक टन गेहूं व उससे दोगुनी-तिगुनी सब्जियां व फल उगाए जा सकते हैं। शुरुआत जयपुर से होगी।
जयपुर में 370 से 380 एमएलडी (मिलियन लीटर रोजाना) पानी की सप्लाई है। इसमें से 260 एमएलडी पानी बेकार हो जाता है। इसका उपयोग फल और सब्जियों के उत्पादन में लगाने की योजना है और वो भी बिना मौसम वाली सब्जियां और फल के उत्पादन में। वैसे तो जयपुर में वेस्ट वाटर को शद्ध करने के लिए पांच ट्रीटमेंट प्लांट लगे हैं, लेकिन उस पानी को और अधिक शुद्ध करने के लिए नवीनतम तकनीक वाले प्लांट लगाकर पानी किसानों को उपलब्ध कराया जाएगा। मुख्यमंत्री और आला अफसरों के इजरायल दौरे में वेस्ट वाटर पर काफी फोकस रहा है।
क्या होगा इस पानी से
अनुमान के मुताबिक एक किलो गेहूं उत्पादन में एक हजार लीटर पानी का उपयोग होता है। अगर 260 एमएलडी (26 करोड़ लीटर) पानी रोजाना ट्रीट करके दिया जाता है तो डेढ़ लाख मीट्रिक टन गेंहूं हो सकता है। इसे फल और सब्जियां उगाने के काम में लिया जाए तो काफी ज्यादा पैदावार मिलेगी। ट्रीट पानी को फागी और चाकसू जैसे सूखे इलाके में किसानों को उपलब्ध कराने पर भी विचार किया जा रहा है। इसके लिए कुछ शुल्क भी लिया जा सकता है।
कम उपयोग से बढ़ती पानी की क्षमता
अगर पानी से फ्लड सिंचाई की जाए तो डाले गए पानी से 7 से 9 फीसदी क्षमता (एफिशिएंसी) का ही उपयोग हो पाता है। वहीं अगर स्प्रिंकल का उपयोग किया जाए तो 35 और ड्रिप इरिगेशन काम में लिया जाए तो 70 फीसदी उपयोग हो सकता है।
इजरायल में है पानी महंगा
इजरायल में खारा या अशुद्ध है। इस पानी को उपयोग में लेने के लिए शुद्धिकरण किया जाता है, इसी कारण वहां पानी महंगा है। वहां 4 से 6 डॉलर प्रति हजार लीटर की कीमत वसूली जाती है। महंगा होने के कारण पानी का पूरा उपयोग करने का प्रयास होता है।
वहां वेस्ट वाटर में से 75 फीसदी को ट्रीटमेंट प्लांट में नवीनतम तकनीक से शुद्ध करके खेती के काम में लिया जाता है। कृषि काम में लिए जाने वाले पानी में 95 फीसदी ट्रीटेड वाटर ही होता है और वो भी ड्रिप इरीगेशन से उपयोग में लिया जाता है।
पानी में ही उगा रहे सब्जियां
इजरायल में पानी के अंदर ही पत्तियों वाली सब्जियां उगाई जा रही है। सब्जियों की पौध को मिट्टी में लगाने के स्थान पर पानी के पौंड में रखा जाता है, जिसमें जड़ें पानी में रहती हैं और पत्ते ऊपर रहते हैं। ग्रीन हाउस में होने वाली इस तरह की खेती से पानी की बचत तो होती है। इसी पानी में फर्टिलाइजर को भी मिक्स कर दिया जाता है, जिससे वांछित फर्टिलाइजर पौधों को मिल जाता है।
साढ़े तीन फीसदी ही करते हैं खेती
इजरायल में साढ़े तीन फीसदी लोग ही खेती के काम में लगे हैं। वहां पानी की तरह मैनपावर भी महंगा है। खेती या अन्य काम के लिए एक आदमी कम से कम 100 डॉलर रोजाना का पारिश्रमिक लेता है। वहां के मार्केट विशेषज्ञ जहां फल-सब्जियों के लिए मार्केट तलाशते हैं, वहीं विश्वविद्यालय, रिसर्च सेंटर, कृषि विशेषज्ञ और अन्य संस्थाएं लगातार शोध करके नई तकनीक तलाशते रहते हैं।
बेस पेपर तैयार करेंगे
इजरायल से लौटने के बाद मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और पीएचईडी मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने वेस्ट वाटर के ट्रीटमेंट और फल-सब्जियों के उत्पादन में उपयोगिता के विषय पर बेस पेपर तैयार करने के निर्देश दिए हैं। पीएचईडी के प्रमुख सचिव डॉ. पुरुषोत्तम अग्रवाल ने बताया कि इजरायल तर्ज पर जयपुर में वेस्ट वाटर के सदुपयोग की योजना तैयार की जा रही है। उन्होंने बताया कि अभी पांच ट्रीटमेंट प्लांट में से निकलने वाली पानी को बगीचों और डिवाइडर पर लगे पौधों के लिए उपयोग किया जाता है।