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ये लोग मनाते हैं मौत का जश्न, बच्चे के जन्म को मानते हैं अभिशाप

6 वर्ष पहले
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जयपुर। पूरी दुनिया में किसी भी परिवार में जब बच्चे का जन्म होता है, तब परिजनों की खुशी सात वे आसमान पर होती है। बच्चा गरीब के यहां हो या अमीर के घर, खुशियां सभी मनाते हैं। राजस्थान की सतिया जनजाति के लोग घर में बच्चे के जन्म पर मातम और परिवार में किसी की मौत पर शानदार जश्न मनाते हैं। समुदाय के लोगों का मानना है कि मौत उनके लिए एक पवित्र एवं महान पल होता है क्योंकि इससे आत्मा शरीर की कैद से आजाद हो जाती है।
जन्म पर मातम और मौत पर जश्न। सुनने में यह बड़ा अटपटा लगता है। यहां यह परंपरा सदियों से चली आ रही है। राजस्थान के सतिया समुदाय की यह रस्म विश्वभर में अनोखी है। इस समुदाय का कोई स्थाई ठिकाना नहीं होता है। इनका पूरा जीवन सड़क किनारे तंबुओं में एक जगह से दूसरी जगह निकल जाता है। इस जाति में साक्षरता दर भी जीरो है। सरकार के तमाम प्रयास भी इनको अपनी पारंपरिक जड़ों से तिल भर भी डिगा नहीं पाए हैं।
मौत पर बांटते हैं मिठाई
इस जनजाति की सबसे खास बात यह कि यहां किसी व्यक्ति की मौत के बाद होने वाले अंतिम संस्कार को काफी धूमधाम से मनाया जाता है। समुदाय के लोग किसी की मौत होने के बाद नए कपड़े पहनते हैं और मिठाइयां, मेवे बांटे जाते हैं और जमकर शराब पीते हैं। इस समुदाय की महिलाएं अनवांछित गतिविधियों में शामिल रहती हैं। इस समुदाय में लड़के की अपेक्षा लड़की को ज्यादा तरजीह दी जाती है।
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