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कुर्बानी, सच और ईमान का प्रतीक है ये मातम, इमाम हुसैन के 40वें पर निकला जुलूस

7 वर्ष पहले
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जयपुर. पैगंबर मोहम्मद साहब के नवासे हजरत इमाम हुसैन का चालीसवां रविवार को मनाया गया। इस मौके पर शिया समुदाय की ओर से जंजीरी मातम मनाया गया।
हजरत इमाम हुसैन की शहादत की याद में शहर में जगह-जगह सलाम व मर्सिया पढ़े गए। मोहल्ला पन्नीगरान में शिया कौमी इमाम बारगाह हकीम बू अली में मजलिस हुई। यहां मौलाना सैयद मोहम्मद अली जैदी ने बयान पेश किया। इसके बाद सलाम पढ़ा और तकवी ब्रदर्स ने मर्सिया अदा किए। मजलिस के बाद इमाम हुसैन की सवारी दुलदुल के घोड़े व अलम के साथ मातमी जुलूस निकला।
जुलूस में अंजुमने असगरिया, अंजुमने मोइनुल अजा, अंजुमने पंजेतनी, अंजुमने कर्बला और अंजुमने अब्बासिया, अंजुमने हैदरी सहित शहरभर की विभिन्न अंजुमनों ने शिरकत की। ये जुलूस कुम्हारों की नदी, पुराना तबेला, मुल्तानिया मस्जिद, चारदरवाजा से सुभाष चौक पहुंचा। इस बीच इमाम हुसैन की सवारी को अकीदतमंदों ने दूध व चने की दाल खिलाई और मन्नतें मांगी।

सुभाष चौक में मना जंजीरी मातम : सुभाष चौक में जंजीरी मातम मनाया गया। इस दौरान या हुसैन-या हुसैन की सदाएं गूंजती रहीं। यहां तकरीर में मौलाना ने कहा कि इस्लाम आतंकवाद नहीं बताता और इस्लाम ही नहीं कोई भी मजहब आतंकवाद नहीं बताता। तकरीर के बाद जुलूस तकवी मंजिल होकर कर्बला पहुंचा। कर्बला में तकरीर के बाद शहर की सभी अंजुमनों ने जंजीरी मातम मनाया।