पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें

नि:शुल्क दवा में 'जहर' का पता लगाने के लिए चर रही ताबड़तोड़ सैंपलिंग

8 वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक

जयपुर. कांग्रेस सरकार की चर्चित निशुल्क दवा योजना की हकीकत जानने के लिए भाजपा सरकार के सत्ता में आने के कुछ ही दिन बाद चिकित्सा मंत्री राजेंद्र राठौड़ ने न केवल जांच कमेटी बनाई, बल्कि दवा के सैपलों की ताबड़तोड़ जांच चल रही है। इसका अंदाजा इस तथ्य से हो जाता है कि पिछले दो साल में औषधि नियंत्रण विभाग ने मात्र 34 सैंपल लिए थे, जबकि अब डेढ़ महीने में ही करीब 50 सैंपल लिए हैं।

बताया जा रहा है कि सैंपलिंग में फुर्ती के पीछे मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के चुनावी प्रचार के दौरान निशुल्क दवा को 'जहरÓ बताने वाला बयान है, जो उन्होंने झुंझुनूं में निशुल्क दवा सप्लाई के लिए गए सैंपल के फेल होने की बात को केंद्र में रखकर दिया था। आरोप है कि निशुल्क सप्लाई वाली दवाओं पर राजस्थान मेडिकल सर्विसेज कॉर्पोरेशन लिमिटेड (आरएमसीएल) ने इतना भरोसा जताया कि दवा के फील्ड में जाने से एक्सपायरी होने तक उनकी सैंपलिंग व जांच पर अघोषित प्रतिबंध सा लगा रखा था। जबकि बड़ा सवाल यह है कि दवा का स्टोरेज सिस्टम प्रॉपर नहीं होने से उसकी गुणवत्ता काफी कम हो सकती है।


पिछली सरकार में ये थी व्यवस्था
एक बार संबंधित फर्म से दवा बनकर आती और सरकार के बजाय स्वीकृत निजी लैब से जांच करा फील्ड (अस्पताल आदि) में भिजवा दिया जाता। उसके बाद दवा की एक्सपायरी तक कोई जांच नहीं होती। जो गिनी-चुनी जांच हुई हैं, वे भी मौखिक आदेश पर, जिनके कोई स्टॉक नहीं जांचे गए। जबकि निजी लैब में ऐसे करीब 19 हजार सैंपल जांचे गए।


स्टोरेज ठीक नहीं तो दवा कारगर नहीं

विशेषज्ञों के मुताबिक, जैसे कोई मरीज डायबिटीज की दवा ले रहा है, लेकिन उसको प्रॉपर स्टोरेज में नहीं रखा तो उसका असर कम होने से शुगर लेवल जितना कंट्रोल होना था, वह नहीं होगा। ऐसे में न तो डॉक्टर और न मरीज को पता लगेगा और बीमारी बढ़ती जाएगी। चिकित्सा मंत्री ने बताया कि दो वर्ष में दवा वितरण से पूर्व एवं बाद में लिए सैंपलों की संख्या की जांच होगी। साथ ही वितरण केन्द्रों पर कम मात्रा में सैंपल उठाने के कारणों का पता लगाएंगे। निजी व सरकारी लैब की जांच के लिए बनाई कमेटी पता लगाएगी कि जिन दवाओं की वहां जांच हो रही है, उसकी सुविधा उनके पास थी या नहीं। कमेटी में ड्रग कंट्रोलर अजय जैन, ड्रग टेस्टिंग लैब के उपनिदेशक एचपी सोनी एवं डीसीओ सिन्धु कुमारी शामिल हैं।

सरकारी दवाओं के सैंपल क्यों नहीं?

ड्रग कंट्रोल अफसर को प्रतिमाह दवाओं के सैंपलिंग टार्गेट दिए हुए हैं। बाजार में ये दवाएं जांच के बाद ही आती हैं, उसके बावजूद इनका स्टोरेज ठीक नहीं होने से जांच में नतीजे फेल होते हैं। सवाल उठता है कि जब बाजार से सैंपल लिए जा रहे थे तो सरकारी दवाओं पर जरूरत से ज्यादा भरोसा क्यों किया? ड्रग कंट्रोलर अजय जैन का कहना है कि निशुल्क दवा वितरण केन्द्रों से रूटीन सैंपल नहीं लिए गए। इसका स्पष्ट जवाब तो नहीं, लेकिन आरएमसीएल की सूचना देने या शिकायत मिलने पर सैंपल उठाते थे। ये भी गिने-चुने क्यों, इस पर उन्होंने कहा कि पुरानी व्यवस्था के बारे में उन्हें पता नहीं, पर अब हम निष्पक्ष रूप से सरकारी और प्राइवेट दवाओं के सैंपल ले रहे हैं। राजस्थान मेडिकल सर्विसेज कॉर्पोरेशन लिमिटेड के प्रबंध निदेशक सुनील धारीवाल ने बताया कि निशुल्क दवा की मॉनिटरिंग का सिस्टम और सुदृढ़ किया जा रहा है।