जयपुर। माइग्रेन, स्ट्रेस, एन्जायटी, डिप्रेशन, अनिद्रा और दिमाग से जुड़ी अन्य बीमारियों का इलाज जब मलेशिया के डॉक्टर नहीं कर पाते तो वे हमारे आयुर्वेद के डॉक्टरों को सौंप देते हैं। इसी कारण जयपुर के राष्ट्रीय आयुर्वेदिक संस्थान में लेक्चरर डॉ. गोपेश मंगल को भारत सरकार ने एक साल पहले मलेशिया के शहर पोर्ट डिक्शन के सरकारी अस्पताल में डेपुटेशन पर भेजा था।
डॉ. मंगल के मुताबिक पंचकर्म इलाज की विशेष पद्धति ‘शिरोधारा’ माइग्रेन, स्ट्रेस मेनेजमेंट का बेस्ट इलाज है। मलेशिया में एलोपैथ डॉक्टर ही ऐसे रोगों का इलाज कर रहे थे। लेकिन अच्छे नतीजों से आयुर्वेद की ओर मलेशिया में रुझान बढ़ा है। शुरुआती कुछ महीनों में वहां के डॉक्टरों ने हमें सिरे से खारिज कर दिया। फिर एक दो मरीजों का इलाज हुआ, उन्हें फायदा हुआ तो संख्या बढ़ी। इसके बाद वहां के ‘दातु’ (वीआईपी) ने भी इलाज कराकर प्रशंसा की। अब तो एलोपैथी के डॉक्टरों ने मरीजों को लगातार रैफर करना शुरू कर दिया है। जुलाई 2014 से लेकर दिसंबर 2014 तक 969 रिकॉर्ड मरीजों का इलाज हुआ है। मार्च से जून 2014 तक शुरुआती स्टेज में केवल 350 मरीज थे।
मलेशिया में अलग सेंटर के लिए मुहिम
फीडबैक में मलेशिया के एलोपैथी अस्पतालों में पंचकर्म विधा सेंटर खोलने की वकालत की गई है। मलेशियन सरकार की मदद से ‘कटिबस्ती’ (कमर दर्द), ‘जानुबस्ती’ (घुटनो और ऑस्टियो ऑर्थराइटिस) और ‘ग्रीवा बस्ती’ (गर्दन और सर्वाइकल के लिए) पद्धतियां शुरू की हैं। दवाइयां और मेडिशनल ऑयल भी भारत से जा रहे हैं। मलेशिया में अभी तक पंचकर्म के इलाज की सभी सुविधाएं मौजूद नहीं होने हमारे यहां मेडिकल टूरिज्म का भी फायदा मिल रहा है।