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स्वाइन फ्लू: दो महिलाओं की ICU में मौत, एक ने निजी अस्पताल में दम तोड़ा

9 वर्ष पहले
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जयपुर.सेठिया आईसीयू में स्वाइन फ्लू से इस साल 14 मरीजों की मौत पर छिड़ी बहस के बीच यहीं पर मंगलवार को दो और स्वाइन फ्लू पॉजिटिव महिलाओं की मौत हो गई। इसके अतिरिक्त निजी अस्पताल में भी एक महिला ने दम तोड़ा। साथ ही जयपुर में स्वाइन फ्लू के छह और मरीज सामने आए हैं।
सेठिया आईसीयू में मंगलवार को चाकसू निवासी 30 वर्षीय गीता देवी व नांगल भीम श्रीमाधोपुर निवासी 20 वर्षीय ममता की इलाज के दौरान मौत हो गई। अस्पताल में विभिन्न जिलों के इस साल अब तक 78 पॉजिटिव मरीज आ चुके हैं। इनमें से 30 आईसीयू में भर्ती हुए, जिनमें से 16 की मौत हो गई।
दूसरी ओर गोपालपुरा बाईपास निवासी सविता की जयपुर के एक निजी अस्पताल में मौत की पुष्टि हुई है। 1 अप्रैल, 2012 से अब तक 207 पॉजिटिव में से 26 की मौत हो चुकी है। गौरतलब है कि सोमवार को भास्कर पड़ताल में आईसीयू की कई खामियां सामने आई थीं, जिसे अस्पताल प्रशासन ने स्वीकारा भी था।
दिनभर हड़ताल पर रहे रेजीडेंट डॉक्टर आरोपी की गिरफ्तारी के बाद लौटे
जेके लोन अस्पताल में शनिवार को बच्चे की मौत के बाद रेजीडेंट से हाथापाई करने के मामले में मोतीडूंगरी पुलिस ने मंगलवार शाम एक युवक को गिरफ्तार कर लिया। इसके बाद काम का बहिष्कार कर एसएमएस अस्पताल में धरने पर बैठे रेजीडेंट ड्यूटी पर लौट आए।
मोतीडूंगरी थानाप्रभारी हरिराम कुमावत ने बताया कि गिरफ्तार आरोपी विक्रम सिंह (25) निवासी गांव फदनपुरा, लक्ष्मणगढ़ है। वह बच्चे सुशांत का रिश्ते में चाचा है। उसके खिलाफ राजकार्य में बाधा व चिकित्सा एक्ट के तहत केस दर्ज किया। उधर, सुशांत की मां की ओर से रेजीडेंट के खिलाफ छेड़छाड़, गैर इरादतन हत्या, गाली-गलौज का केस दर्ज कराया गया था, लेकिन पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की।
श्रीराजपूत करणी सेना के नेतृत्व में परिजनों ने कमिश्नर को एक ज्ञापन सौंपा। उन्होंने आरोपी डॉक्टर्स की शीघ्र गिरफ्तारी की मांग की। एसएमएस मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. सुभाष नेपालिया ने बताया कि रेजीडेंट डॉक्टरों के सामूहिक अवकाश की एप्लीकेशन को निरस्त कर दिया।
न दवाइयां, न बेड मिल रहे और न वेंटिलेटर की व्यवस्था
आईसीयू में अव्यवस्था और स्वाइन फ्लू की रोकथाम में सरकार की अक्षमता और संवेदनहीनता के मुद्दे पर भाजपा विधायकों ने मंगलवार को शून्यकाल में सदन से बहिर्गमन किया। भाजपा विधायकों ने सरकार से इस पर वक्तव्य की मांग की।
शून्यकाल में भाजपा के ओम बिड़ला और राजेंद्र राठौड़ ने यह मामला उठाया। इनका कहना था कि प्रदेश में स्वाइन फ्लू से लगातार मौतें हो रही हैं। हालात यहां तक पहुंच गए हैं कि आईसीयू में भी स्वाइन फ्लू के रोगी मर रहे हैं। साथ ही भाजपा के अन्य सदस्य भी वेल में आ गए और नारेबाजी शुरू कर दी।
प्रतिपक्ष के नेता गुलाबचंद कटारिया ने कहा कि प्रदेश का एक भी जिला ऐसा नहीं बचा है जहां स्वाइन फ्लू का प्रकोप नहीं हो। सरकार अब तक इस रोग की रोकथाम के लिए प्रभावी कदम उठा पाने में विफल रही है। अस्पतालों में कोई इंतजाम नहीं है। इसके बाद कटारिया ने बहिर्गमन करने की घोषणा की।
कहने पर गए वेल में
स्वाइन फ्लू के मुद्दे पर तीन विधायकों के वेल में जाने के बाद भाजपा विधायक दल के सचेतक राजेंद्र राठौड़ ने सभी विधायकों को वेल में जाने का इशारा किया, लेकिन वहां कुछ ही पहुंचे। इस पर राठौड़ को विधायकों के पास जा-जा कर जाने के लिए कहना पड़ा, तब जाकर विधायक वेल में गए।