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ROS के सैंपल पैकेजिंग टेस्ट में फेल, बैक्टीरियल इंफेक्शन व फंगस की आशंका

6 वर्ष पहले
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जयपुर. उल्टी-दस्त से बच्चों को बचाने वाले जीवन रक्षक घोल (ओआरएस यानी ओरल रि-हाइड्रेशन सोल्यूशन) का सैंपल ही जांच में फेल हो गया। इनमें बैक्टीरियल इंफेक्शन और फंगस की आशंका जताई गई। डीहाइड्रेशन में ऐसा ओआरएस कोई लेता है तो उसे गंभीर संक्रमण हो सकता है। बच्चों की तो इससे जान भी जा सकती है। राज्य सरकार ने केंद्र सरकार की कंपनी पर प्रतिबंध लगा दिया।
सीकर रोड पर विश्वकर्मा स्थित राजस्थान ड्रग्स एंड फार्मास्युटिकल्स लिमिटेड (आरडीपीएल) से राज्य सरकार ने ओआरएस के 220 बैच के 30 लाख पैकेट खरीदे थे, जिनमें से 20 बैच के पैकेट पैकेजिंग टेस्ट में फेल हो गए। नियमानुसार तीन से ज्यादा सैंपल फेल होने पर कंपनी को डिबार (सप्लाई रद्द) कर दिया जाता है। राज्य सरकार की ओर से आंगनबाड़ी केन्द्र, उपस्वास्थ्य केन्द्र, डिस्पेंसरी, प्राथमिक व सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र, जिला व सैटेलाइट अस्पताल और मेडिकल कॉलेज से जुड़े अस्पतालों में ओआरएस निशुल्क उपलब्ध कराया जाता है।
जानिए, कितना महत्वपूर्ण है टेस्ट, फेल होने के खतरे
जीवन रक्षक घोल होने से इसकी पैकिंग ऐसी होनी चाहिए ताकि हवा और नमी अंदर प्रवेश न कर सकें। ऐसा नहीं होने पर बैक्टीरिया व फंगस तेजी से पनप सकता है, जो बच्चों के लिए जानलेवा भी साबित हो सकता है।
दो फीसदी से कम होनी चाहिए नमी अन्यथा संक्रमण
जेके लोन अस्पताल के वरिष्ठ शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ.अशोक गुप्ता ने बताया कि ओआरएस के पैकेट में नमी 2 फीसदी से कम होनी चाहिए। नमी बढ़ने से शुगर व अन्य मिक्स साल्ट से जीवाणु बढ़ जाते हैं और इस पाउडर का इस्तेमाल करने से रोगी के शरीर में संक्रमण की संभावना के साथ ही गंभीर हालत हो सकती है।
> फार्मा विशेषज्ञ वीएन वर्मा का कहना है कि पैकेजिंग खुली रहने से ऐसी जीवन रक्षक दवाओं में ग्लूकोज की उपस्थिति से बैक्टीरिया आसानी से पनप सकते हैं।
> ओआरएस में सोडियम, पोटेशियम, क्लोराइड, सिट्रेट और डेक्सट्रोज जैसे इलेक्ट्रोलाइट होते हैं। पाउडर में नमी होने से ये बेअसर हो जाते हैं।
> किसी व्यक्ति को उल्टी-दस्त होने पर खून के अंदर इलेक्ट्रोलाइट की सही मात्रा होनी चाहिए। ज्यादा या कम होने पर ब्लड प्रेशर कम या अधिक हो जाता है।
ये बैच हुए फेल
आरडीपीएल के ओआरएस के फेल होने वाले बैच नंबरों में ओआरपी-054, 056, 061, 65, 066, 069, 073, 076, 077, 079, 083, 085, 090, 093, 094, 095, 097, 099, 101 और 103 हैं। एक बैच में करीबन 15 हजार पैकेट होते हैं।
ये है मानक
इंडियन फार्माकोपिया-2014 के अनुसार, ओआरएस की जांच में पहली शर्त है यूनिफॉर्मिटी ऑफ वेट, जो 85 से 115 फीसदी के बीच होनी चाहिए, जिसमें सोडियम, पोटेशियम, क्लोराइड, सिट्रेट व डेक्सट्रोज का कुल वजन देखा जाता है। दूसरा सील या लीकेज टेस्ट में पाउच में पाउडर सूखा होना चाहिए।
क्या कहते हैं जिम्मेदार
ओआरएस की पैकेजिंग में बैच फेल हुए थे, लेकिन अब हमने तापमान को नियंत्रित करने तथा पैकेजिंग को सुधारने के लिए आधुनिक मशीन लगाई है। यहां पर कार्यरत स्टाफ को प्रशिक्षण दिया जा चुका है। अब किसी तरह की दिक्कत नहीं है। राज्य सरकार को फिर से दवाओं की आपूर्ति के लिए लिखा है। -विनोद सिंघई, वर्क्स मैनेजर,आरडीपीएल, जयपुर