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सोनियाजी थीं, वरना मेरा तो टिकट ही कटवा दिया था

9 वर्ष पहले
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जयपुर. विधानसभा उपाध्यक्ष और कांग्रेस नेता रामनारायण मीणा ने कहा है कि प्रदेश कांग्रेस में गुटबाजी के चलते वरिष्ठ नेताओं तक के टिकट कट जाते हैं और गुटबाज बच जाते हैं। यह तो सोनिया गांधी थीं, वरना कुछ नेताओं ने तो उनका टिकट ही कटवा दिया था। उन्होंने अनुशासन तोड़ने वाले लोगों को मंत्रिमंडल में रखने और कांग्रेस के खिलाफ चुनाव जीतने वालों को प्रभारी मंत्री बनाए जाने पर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि राज्य के अफसर योजनाओं की प्रभावी इंप्लीमेंटेशन नहीं कर पा रहे हैं। मॉनिटरिंग का भी अभाव है। उनसे बेबाक बातचीत: बीकानेर में आपने क्या विवादित बयान दिया था? मैंने कहा था-ये कांग्रेस का राज है, इसमें कांग्रेस की नीति में विश्वास करने वालों और रिजल्ट देने वालों को सही जगह पर नहीं लगाया गया। किन अफसरों को किस विभाग में गलत लगाया है? ऊर्जा, उद्योग, सिंचाई, पीएचईडी जैसे कई विभाग हैं। पॉलिसीज को कारगर बनाने के लिए सेलेक्टेड लोगों को लगाएं। चेंजेज करें। मुख्यमंत्री मुफ्त दवा योजना तो अच्छी है, पर इंप्लीमेंटेशन ढीला क्यों है? ऊर्जा में बाधाएं क्यों हैं? प्रोडक्शन क्यों नहीं बढ़ा है? कोयला गीला क्यों आ रहा है? इस सरकार की कई पॉलिसीज बहुत अच्छी हैं, लेकिन उनका इंप्लीमेंटेशन ठीक क्यों नहीं है? भ्रष्ट अफसरों के खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं होती है? तो आप अपने नेताओं को क्या नसीहत देंगे? अब भी समय है। संभल जाओ। पॉलिसीज को इफेक्टिवली इंप्लीमेंट करो। सही जगह सही अफसर लगाओ। हमारे पास ईमानदार और रिजल्ट देने वाले अफसर भी हैं। ..मुंह न खोलूं तो ठीक है, लेकिन काफी कुछ करने की गुंजाइश है। आपको क्या करने की गुंजाइश लगती है? हम पावर प्रोडक्शन को ठीक कर सकते हैं। खर्च कम कर सकते हैं। कानून और व्यवस्था को दुरुस्त करें। हर विभाग में ठीक काम किया जा सकता है। सपोर्ट प्राइस पर गेहूं खरीद की जिम्मेदारी तो एफसीआई की थी, लेकिन हम गेहूं खरीद की सही-सही मॉनिटरिंग क्यों नहीं कर पाए? सहकारिता को क्यों नहीं ठीक करते? भू-सरंक्षण विभाग निष्क्रिय क्यों है? बांध क्यों बर्बाद हैं? कांग्रेस में कितने गुट हैं? दो ही अहम हैं। क्या ये गुट अशोक गहलोत और सीपी जोशी के हैं? मुझसे न पूछिए, ये कौन-कौन हैं। मुझे तो तकलीफ होती है। ..मुझ जैसे नेता का टिकट कटता है तो क्या ये गुटबाजी की पराकाष्ठा नहीं है? वो तो सोनिया जी थीं, वरना मेरा तो टिकट ही कटवा दिया था। राज्य सरकार में कांग्रेस की टिकट पर जीता एक भी मीणा विधायक मंत्री क्यों नहीं है? ये तो आप उन लीडरों से पूछो जो जिम्मेदार हैं। उनसे पूछो जो हाईकमान के नजदीक हैं। केंद्र में महासचिव रहे हैं। दूसरी बार मुख्यमंत्री हैं..ही इज कांग्रेस..। आप सीधे-सीधे नाम क्यों नहीं लेते? वे हमारे नेता हैं। आप जैसा नेता इतना उपेक्षित क्यों है? आम राजस्थानी को इस बात से तकलीफ है। प्रदेश के बाहर भी इस बात पर चिंतन होता है कि ये उपेक्षित हैं। ..मेरे समर्थक ऐसा सोचते हैं ..विधानसभा उपाध्यक्ष का पद दिलाने के मामले में मेरे समर्थन में मेरी पार्टी ही नहीं, वसुंधरा राजे, कटारिया, तिवाड़ी, अमराराम सभी मेरे पक्ष में थे। आप जैसे नेता की जैसी सेवाएं ली जानी चाहिए, वैसी क्यों नहीं ली जा रहीं? मैं 1960 से राजनीति में हूं। मैंने उस साल एक दिन पंडित नेहरू के साथ एकांत में बिताया। चार बार एमएलए, एक बार एमपी रहा हूं। आजकल वरिष्ठता आंकी नहीं जाती। सिद्धांत वाली बात रही नहीं। मैं किसी धड़े में हूं नहीं। मैं कांग्रेस का हूं। इसीलिए मेरा टिकट कटता रहा। गुटबाजों को फायदा रहता है। गुट का नेता आपको बचा लेता है। आज के राजनीतिक हालात पर आप क्या कहते हैं? हालात इसलिए ठीक हैं, क्योंकि विरोधी मजबूत नहीं है। वहां भी क्या कम धड़ेबंदी है! कुछ लोगों ने राज्यसभा चुनाव में भाजपा के लोगों को वोट डाले। वे अब भी मंत्रिमंडल में क्यों हैं? अनुशासन का पालन हर स्तर पर होना चाहिए। पिछले दिनों आपके इलाके में सरकार के एक मंत्री ने कांग्रेस के नेता नईमुद्दीन गुड्डू को हरवा दिया और भाजपा के उम्मीदवार को जितवा दिया? जिस मंत्री पर ये आरोप लगा है, वे सरकार में मुख्यमंत्री के बाद नंबर टू माने जाते हैं। ऐसे व्यक्ति के खिलाफ एक भी शब्द बोलना क्या अच्छा संदेश देगा? क्या ये शांति धारीवाल हैं? मैं आजकल अजमेर संभाग से हूं, कोटा से नहीं। इसलिए क्या कहूं। सरकार के कामकाज पर आपका क्या कहना है? ये आखिरी साल है। छह महीने पहले काम वैसे ही बंद हो जाता है। सरकार घोषणाओं से नहीं, फील्ड में प्रैक्टिकली अच्छा करने और रिजल्ट देने से चलती है। कोरी घोषणाओं से कुछ नहीं होने वाला। व्यक्तिगत स्तर पर भी प्रदर्शन अच्छा होना जरूरी है। अशोक गहलोत और वसुंधरा राजे के नेतृत्व में आप क्या समानताएं या अंतर देखते हैं? जनता डेढ़ साल बाद अपने आप ये अंतर बता देगी। ..गहलोत गरीबोन्मुख ज्यादा हैं। बिजली में क्यों है इतना कुप्रबंध? मैं 52 साल से राजनीति में हूं..क्यों नहीं लगाए जा रहे सही अफसर सही पदों पर, बिजली विभाग में इतना कुप्रबंध क्यों है? योजनाएं अच्छी, लेकिन प्रभावी अमल नहीं, हमारा बहुमत फिर भी 33 में से 16 जिलों में ऐसे मंत्री प्रभारी क्यों, जिन्होंने कांग्रेस के खिलाफ चुनाव लड़ा, अब भी समय है, समझ जाइए। आपको मंत्री क्यों नहीं बनाया गया? मैं दो संभागों और पांच जिलों को रिप्रेजेंट कर चुका हूं। इस स्तर का एक भी नेता नहीं है। भैरोंसिंह जी रहे नहीं। मुझे तकलीफ है कि पार्टी के खिलाफ चुनाव लड़ने वालों को मंत्री बना दिया। अनुशासन भंग करने वाले आज भी मंत्री हैं। इंदिरा जी को गाली देने वालों को इज्जत दी जाए तो तकलीफ क्यों नहीं होगी? ..33 में से 16 जिलों के प्रभारी ऐसे मंत्री क्यों हैं, जो कांग्रेस के खिलाफ जीतकर आए?

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