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इंटरसेप्टर क्रैश लैब जांच : 15 में से 11 ट्रैफिक पॉइंट फेल, ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन

7 वर्ष पहले
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जयपुर. ट्रैफिक पुलिस की हाइटेक तकनीक वाली इंटरसेप्टर क्रैश लैब ने शहर में सड़क दुर्घटनाओं की जांच करना शुरू कर दिया है। प्रमुख मार्ग अजमेर रोड, सीकर रोड, आगरा रोड, दिल्ली रोड, न्यू सांगानेर रोड बी-2 बाईपास पर चिह्नित दुर्घटना वाले कुछ प्वाइंट्स पर रोड इंजीनियरिंग व अन्य तकनीकी खामियां सामने आई हैं। करीब 15 प्वाइंट्स में सिर्फ 4 ऐसे पाए गए, जहां दुर्घटना की आशंका कम है। अब पुलिस इन खामियों की जांच कर संबंधित विभाग से संपर्क कर इन्हें दूर करने की कवायद शुरू करेगी।

उल्लेखनीय है कि यह इंटरसेप्टर क्रैश लैब को विशेष तौर पर सड़क दुर्घटनाओं के कारणों की पड़ताल के लिए पुलिस महकमे ने खरीदा था। इंटरसेप्टर क्रैश लैब की कमान एसआई, राजकिरण, कांस्टेबल मुकेश शर्मा,
यहां तकनीकी खामियां, ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन
>दिल्ली बाइपास पर ऑटोमोबाइल कॉलोनी, मंडी खटीकान, ईदगाह, आरएसी कट होने से स्थानीय कॉलोनीवासी गलत दिशा में गफलत पूर्वक वाहन चलाते हैं, रोड कट के बीच से गुजरते हैं, सड़क किनारे नो पार्किंग में भारी वाहन खड़े रहते हैं। इसके समाधान के लिए आरएसी ब्लिंकर लाइट को चालू किया जाए।
>धोबीघाट व सड़वा मोड़ पर वाहन चालक बिना हेलमेट तेज स्पीड में होते हैं, रोड कट पर रांग साइड में टर्न करना हादसे का बड़ा कारण है। रामगढ़ मोड़ पर मानबाग प्वाइंट पर ढलान है। रफ्तार पर काबू के लिए सड़क के दोनों तरफ रैंप रेंबलर लगवाए जाएं।
>अल्का तिराहे पर ट्रैफिक सिग्नल का उल्लंघन। तेज गति में वाहन चलते हैं। रोड की चौड़ाई ज्यादा है। रोड नंबर 14 पुलिया पर भारी वाहनों का दबाव है। वाहन चालक रांग साइड चलते हैं। ट्रैफिक बत्ती का समय कम, पुलिस नहीं है। खेतान चौराहे पर क्रॉस करते वक्त वाहन नहीं रुकते, गली से निकलने वाले वाहन चालक भी लापरवाही करते हैं। ओवरब्रिज बनने से समाधान हो सकता है। पैदल यात्रियों की क्रॉसिंग ज्यादा है। ट्रैफिक पुलिसकर्मी तैनात हों।
इस तरह होती है दुर्घटना कारणों की पड़ताल
उच्च तकनीक युक्त वाहन में कैमरा युक्त स्पीड लेजर गन, जमीन से 15 फीट ऊंचा 73 एक्स जूम का टॉप कैमरा लगा है, जो कि रिमोट से संचालित है और करीब सड़क पर दो से तीन किमी दूर तक वाहन की लोकेशन व स्पीड को माप सकता है। दुर्घटना थानों से प्राप्त दुर्घटना वाले प्वाइंट पर लैब की टीम जाकर उससे करीब सौ मीटर की दूरी पर गाड़ी को खड़ी कर टॉप कैमरा शुरू करती है।
उसके बाद वाहनों की स्पीड, रोड पार्किंग, ट्रैफिक दबाव, रोड कट क्रॉस कर रहे राहगीरों व वाहन चालकों, ओवरटेकिंग व ओवरलोडिंग कर रहे वाहनों की करीब एक घंटे तक रिकॉर्डिंग करती है। अगले दिन फिर उसी प्वाइंट पर दूसरे वक्त एक घंटे तक रिकॉर्डिंग होती है। बारीकी से पड़ताल में इनमें जो खामियां पाई जाती हैं, उनकी रोड एक्सीडेंट में सामने आए कारणों से तुलना की जाती है।