जयपुर. दस प्रतिबंधित जिलों में तबादलों व प्रतिनियुक्तियों पर लगा प्रतिबंध बिना रसूखदार शिक्षकों पर ही लागू हो रहा है। शिक्षा विभाग के अधिकारियों द्वारा इन जिलों में तबादले व प्रतिनियुक्तियां करके एप्रोच रखने वाले शिक्षकों को फायदा पहुंचाया जा रहा है। भास्कर के पास पहुंची शिक्षा विभाग के आदेशों की प्रतियों में यह चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है। इन आदेशों को देखकर वर्षों से प्रतिबंधित जिलों में नौकरी कर रहे शिक्षकों में आक्रोश है।
उनका कहना है कि प्रतिबंधित जिलों से चहेतों के तबादले हो रहे हैं, सरकार ने तबादलों के लिए कोई नीति नहीं बना रखी। इसका फायदा उठाकर गवर्नमेंट ऑर्डर के जरिए मनचाही पोस्टिंग दी जा रही है। वर्षों से यहां नौकरी करने वाले शिक्षक नेताओं और अधिकारियों के इस रवैये से बेहद आहत हैं।
चहेतों को प्रतिनियुक्ति के नाम पर भेज रहे हैं सामान्य जिलों में
शिक्षा विभाग के अधिकारी चहेतों को प्रतिनियुक्ति के नाम पर डार्क जोन से दूसरे सामान्य जिलों में भेज रहे हैं। यह सब जीओ के नाम पर हो रहा है। बीईईओ कार्यालय बालोतरा बाड़मेर के 14 अगस्त 2014 के आदेश में अमिता कुमारी को दूसरे जिले में कार्य व्यवस्थार्थ लगा दिया। अमिता को राजकीय प्राथमिक स्कूल राईका सिंधियों की ढाणी, बालोतरा बाड़मेर से राजकीय िवद्यालय भोजासर झुंझुनूं में 31 दिसंबर तक के लिए लगाया गया है।
जीओ के जरिए कर दिया दो शिक्षकों का तबादला
निदेशक प्रारंभिक शिक्षा बीकानेर की ओर से 15 जुलाई 2014 को डूंगरपुर के जिला शिक्षा अधिकारी (प्रारंभिक) को दो शिक्षकों के तबादला करने का आदेश दिए। आदेश में यह भी कहा गया कि इस तबादला आदेश का तत्काल पालन कर रिपोर्ट निदेशक को भिजवाएं। इसमें कीर्ति शर्मा का राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय मेघवालों की ढाणी, चौहटन ब्लॉक बाड़मेर से प्रारंभिक शिक्षा ब्लॉक डूंगरपुर में किया गया। इसी आदेश में भवानीशंकर का राजकीय उच्च प्राथमिक स्कूल मनपुर डूंगरपुर से राजकीय माध्यमिक स्कूल सतीरामपुर डूंगरपुर में किया गया।
अधिकारियों ने आदेश दिया, हमने पालना कर दी
प्रतिबंधित जिले में भी तबादले नहीं हो सकते। जुलाई में जीओ से तबादले हुए थे। हमें तो जो आदेश मिला, उसकी पालन कर दी। विभाग में चर्चा थी कि जीओ के लिए राष्ट्रीय स्तर के भाजपा नेता की सिफारिश थी। - बंशीलाल रोत, तत्कालीन डीईओ (प्रा.) डूंगरपुर
एमएलए, मंत्री की सिफारिश पर मनचाही पोस्टिंग
जीओ के नाम पर मंत्री, एमएलए व एमपी अपने चहेतों के तबादले व प्रतिनियुक्ति करा लाते हैं। इस पर रोक लगनी चाहिए। डार्क जोन से पहले सामान्य जिलों में भी तबादले नहीं होने चाहिए। - सुरेश मिर्धा, अध्यक्ष, प्रतिबंधित जिला शिक्षक संघर्ष समिति राजस्थान
सीएम स्तर पर डार्क जोन में तबादलों पर निर्णय
शिक्षा विभाग के सूत्रों के मुताबिक तबादलों से प्रतिबंध हटने के बाद प्रतिबंधित जिलों से तबादलों के लिए सरकार पर दबाव है। यहां तबादलों होंगे या नहीं। यह निर्णय सीएम स्तर पर होगा। माना जा रहा है कि इसमें महिला व पुरुषों के लिए कुछ साल तय कर राहत दी जा सकती है।