जयपुर। मुगलकालीन और ब्रिटिश शासन के जमाने की दुर्लभ वस्तुओं को जयपुर के एसआरसी म्यूजियम ऑफ इंडोलॉजी एंड यूनिवर्सल में सहेज कर रखा गया है। इंडोलॉजी का अर्थ है इतिहास, भाषा, साहित्य अौर संस्कृति के अघ्ययन से जुड़ी शाखा। गंगवाल पार्क स्थित इस म्यूजियम की शुरुआत 1979 में आचार्य रामचरण शर्मा व्याकुल ने की।
यह दरअसल एक प्राइवेट कलेक्शन है जिसे नई पीढ़ी को प्राचीन धरोहर से रूबरू करवाने के लिए शुरू किया गया। इस कलेक्शन पर देश-विदेश के 400 स्टूडेंट्स कर चुके हैं रिसर्च।
18 विभागों में विभाजित है कलेक्शन
म्यूजियम के डायरेक्टर शरद कांत शर्मा ने बताया कि कलेक्शन के 18 विभाग हैं। इसमें हस्तलिखित ग्रंथ, ऐतिहासिक पुरालेख, लोक परंपरा को दर्शाती चित्रकला, वस्त्र कला, विनिमय, टंक एवं डाक मुद्रादि, प्रस्तर शिल्प, धातु शिल्प एवं प्रतिमा, जीवाश्म, आयुर्वेद एवं रस रसायन, खगोल एवं ज्योतिष विज्ञान, तंत्र-मंत्र आदि विषयों से संबंधित दुर्लभ वस्तुएं सजी हुई हैं।
ये एग्जीबिट हैं खास
मध्यप्रदेश की राजकुमारी का कांच से बना पलंग, जो ब्रिटिशर्स के जमाने का है। इस पलंग के पाए भी कांच से बने हुए हैं। आठवीं शताब्दी के शिलालेख, 11वीं शताब्दी के ताड़-पत्र व भोज-पत्र और 200 साल पुराना हाथी-पत्र लेख । 15वीं शताब्दी के संस्कृत ग्रंथ, 17वीं शताब्दी में औरंगजेब की लिखी कुरान शरीफ, ब्रिटिशर्स के जमाने का पंखा, प्रिजर्व करके रखी गई हैं। इसमें सवाई जयसिंह के लिखे पत्र, पेपर काटने व लिखने के औजार, सोने-चांदी की किताबें, रॉयल सील, ब्रिटिश मोहर, मुगलकालीन की दुर्लभ पेंटिंग, 200 साल पुराने गोल्ड सिल्वर, दुनिया के सबसे छोटे सिक्के, मोनोग्राम मेडल और लोकचित्र का सबसे बड़ा कलेक्शन शामिल है। म्यूजियम में करीब 20 हजार ग्रंथ हैं। इनमें से करीब 10 प्रतिशत ग्रंथों को ही डिसप्ले किया गया है।
शिष्यों से मिला कलेक्शन
स्व. आचार्य रामचरण शर्मा सन 1955 से कलेक्शन एकत्रित करते आएं है। उस समय में इन चीजों की वैल्यू से ज्यादा सोने व चांदी की होती थी। ऐसे में शिष्यों, दोस्तों व परिजनों से उन्हें जो भी चीज दी उन्होंने सब को संभाल कर रखा। आज इस म्यूजियम को कई लोगों ने पुरानी वस्तुओं को डोनेट भी किया है।
कलेक्शन की कुछ नायाब चीजें
l 20000 प्राचीन ग्रंथ, जो 834 ई. से 1143 ई.के दौर के हैं।
l 1805 में प्रकाशित भारत का सबसे पुराना समाचार पत्र।
l 1856 में प्रकाशित राजस्थान का सबसे पुराना समाचार पत्र
l अंतिम मुगल सम्राट (बहादुर शाह जफर) के पुत्र (मिर्जा अख्तर सुल्तान) का वैवाहिक पत्र (सन 1850 से पहले का )
l मध्यप्रदेश की राजकुमारी का कांच से बना पलंग, जो ब्रिटिशर्स के जमाने का है। इस पलंग के पाए भी कांच से बने हुए हैं।
l कागज पर सबसे बड़ा मुगल शैली चित्र (8बाय4फुट )
l एक म्यान में दो तलवार (छत्रपति संभाजी की) तथा गेंडे, मगरमच्छ, कछुए की खाल से बनी ढालें
l प्राचीन जीवाश्म (180 लाख वर्ष पुराना)
l अंतरिक्ष से प्राप्त उल्का प्रस्तर (टूटा हुए तारे का टुकड़ा), लचीला पत्थर, पानी से भरा एवं पानी पर तैरने वाले पत्थर
l ब्रिटिश कालीन शाही कांच का पलंग एवं कांच का मृदंग (ढोलक)