नई दिल्ली/जयपुर। राजस्थान को मौजूदा वित्त वर्ष में मिलने वाली कुल केंद्रीय सहायता की 97.5 प्रतिशत राशि केंद्रीय योजनाओं में ही खर्च होती है। राज्य योजनाओं के लिए सिर्फ 2.5 प्रतिशत राशि ही बचेगी। मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने रविवार को नीति आयोग की बैठक में प्रधानमंत्री के समक्ष इसी तरह के वित्तीय मुद्दे उठाए और इसके लिए सुझाव भी दिए। नई दिल्ली में प्रधानमंत्री निवास सात रेस कोर्स पर नीति आयोग की शासकीय परिषद की पहली बैठक हुई। इसमें राज्यों के मुख्यमंत्रियों और केन्द्र शासित राज्यों के उपराज्यपालों ने भाग लिया।
राजे ने कहा कि केन्द्र प्रायोजित योजनाओं की संख्या दस से ज्यादा नहीं होनी चाहिए तथा इन योजनाओं का क्षेत्राधिकार केन्द्रीय एवं समवर्ती सूची के विषयों तक ही सीमित होना चाहिए। राजे ने मांग की कि केंद्र और राज्यों के बीच मसलों को निपटाने के लिए उच्चाधिकार समिति का गठन हो।
विकास योजनाएं बनाने का काम राज्यों पर छोड़ दिया जाना चाहिए
राजे ने कहा कि विकास के लिए योजना बनाने का कार्य राज्यों पर छोड़ दिया जाना चाहिए, जिससे राज्य अपनी सभी क्षेत्रीय आकांक्षाओं एवं जरूरतों को प्राथमिकता प्रदान कर सके। उन्होनें योजना एवं गैर योजना मदों के दिखावटी भेद को खत्म करने का सुझाव भी दिया। उन्होंने कहा कि समग्र योजना के अनुमोदन की जरूरत नहीं होनी चाहिए। साथ ही राज्यों को योजना दृष्टिकोण की तैयारी के लिए विशेषज्ञों की सहायता भी आयोग द्वारा प्रदान कराई जानी चाहिए।
उन्होंने केंद्र प्रवर्तित योजनाओं की संख्या 10 से अधिक नहीं रखने और शेष राशि को राज्यों को जरूरत के हिसाब से खर्च करने का अधिकार मिलना चाहिए। इससे राज्यों की वित्तीय स्थिति मजबूत होगी तथा राजस्थान में क्षेत्रीय विशेषताओं पर आधारित डांग, मगरा, मेवात, देवनारायण एवं पेयजल की परियोजनाओं को बेहतर रूप से कार्यान्वित किया जा सकेगा।
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