(जीत के बाद सचिन पायलट को मिठाई खिलाकर बधाई देते पार्टी कार्यकर्ता।)
जयपुर. प्रदेश की चार विधानसभा सीटों के लिए हुए इस उप चुनाव ने पिछले 62 साल के राजनीतिक ट्रेंड को बदल दिया है। प्रदेश में विधानसभा चुनाव के एक या दो साल बाद जितने भी उप चुनाव हुए हैं उनमें सत्तारूढ़ पार्टी को ही फायदा मिलता रहा है लेकिन इस बार परिणाम इसके उलट आए हैं। 1952 में पहली विधानसभा की 14 सीटों के उप चुनाव हुए जिनमें 12 सीटें सत्तारूढ़ पार्टी कांग्रेस की झोली में गई।
प्रदेश में 1951 से लेकर 1972 तक एक ही पार्टी की सरकार रही। इस दौरान जितने भी उप चुनाव हुए उनमें कांग्रेस को ही फायदा मिला। आपातकाल के बाद प्रदेश में जनता पार्टी की सरकार बनी ऐसे में 1978 में दो सीटों के लिए हुए उप चुनाव में ये दोनों सीटें जनता पार्टी के खाते में गई।
इस हार के ये रहे कारण
इन नतीजों के पीछे मंत्रिमंडल विस्तार में हुई देरी, मंत्रियों के विवादास्पद बयान और निशुल्क दवा, पेंशन जैसी योजनाओं की अनदेखी को बड़ा कारण माना जा रहा है।
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