जयपुर. रिंग रोड के लिए अवाप्त जमीनों के कब्जे लेने को लेकर राज्य सरकार की ओर से की जा रही सख्ती और प्रक्रिया का प्रभावित किसानों ने विरोध जताया है। किसानों का कहना है कि सरकार ने दमनकारी नीति अपनाते हुए किसानों को जबरन जेल में बंद कर दिया। अन्य को डराया-धमकाया जा रहा है। जबकि किसान तो केन्द्र सरकार की ओर से लागू नए भूमि अधिग्रहण एक्ट के तहत जमीनों के मुआवजे की मांग कर रहे हैं, जिसे राज्य सरकार नहीं मान रही।
किसान प्रतिनिधि घासी लाल शर्मा सहित रिंग रोड संघर्ष समिति की युवा कोर टीम के सदस्य गोलू राम और कैलाश शर्मा ने कहा है कि सरकार की ओर से किसानों को विकास के विरोधी होने की बात प्रचारित की जा रही है, जबकि किसान रिंग रोड के विरोध में नहीं होकर जमीनों का एक्ट मुताबिक मुआवजा की मांग रहे हैं।
सरकार की ओर से रिंग रोड के लिए 2004 में जमीनें अवाप्त की थी, लेकिन काम आगे नहीं बढ़ाया, अब जब नया एक्ट लागू हो गया तो मुआवजे भी तो उसी हिसाब से देने चाहिए। इसके विपरीत सरकार बलपूर्वक किसानों से जमीनें कब्जे में ले रही है। एक तो सरकार ने किसानों से वार्ता नहीं की, दूसरा लोगों को जबरन जेल में डाल दिया। किसानों ने संघर्ष समिति के अध्यक्ष और सचिव की गिरफ्तारी के बाद भी आंदोलन को जारी रखने की बात कही है। समिति सदस्यों मुताबिक पुलिस बार-बार शांतिपूर्वक धरना कर रहे किसानों को गिरफ्तारी का भय दिखा रही है।