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7 साल की देरी, लागत 6 करोड़ से बढ़कर 11.50 करोड़ पहुंची

7 वर्ष पहले
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जोधपुर. सात साल बाद बगैर कोई औपचारिकता रविवार को सांगरिया ओवरब्रिज पर यातायात चालू कर दिया गया। रेलवे का तय समय पूरा होने के बाद दोपहर 1:15 बजे अचानक रेल फाटक बंद कर दिया। काम करने वाली ठेका फर्म व ग्रीप के अधिकारियों ने रेलवे अफसरों के दबाव में गुपचुप नारियल फोड़कर आेवरब्रिज पर यातायात चालू करवा दिया।
वहां से गुजर रहे वाहन चालकों को एक बार तो कुछ समझ में नहीं आया, फिर वे रेलवे फाटक से गुजरने लगे, लेकिन बाद में फाटक बंद कर दी गई। इस मौके पर ग्रीप के रणजीतसिंह परिहार, शिवशक्ति एंटरप्राइजेज के आशीश अग्रवाल, ठेकेदार नेमाराम सोऊ व अशोक सोऊ ने नारियल फोड़कर आरआेबी पर यातायात चालू कर दिया। इस अवसर पर अमन, पुखराज, उम्मेदराम, मनोहर व किशन भी उपस्थित थे।
हाईकोर्ट का दबाव होने के बावजूद 5 साल बाद चालू हुआ
हाईकोर्ट के आदेश पर सांगरिया रेलवे फाटक पर आेवरब्रिज का निर्माण वर्ष 2008-09 में चालू हुआ। दो पीयर भर गए, लेकिन रेलवे द्वारा डिजाइन पर आपत्ति जताने के बाद बीआरआे व रेलवे में टकराव के कारण काम अटका रहा। वर्ष 2010-11 में काम दुबारा शुरू हुआ। रेलवे लाइन पर आेवरब्रिज के निर्माण के बाद दोनों तरफ संपर्क सड़क का काम रामदेव कंस्ट्रक्शन कंपनी ने किया।
अफसरों ने फोन पर कहा तो यातायात खोल दिया
रेलवे के अफसरों ने आरआेबी पर यातायात चालू करने की अंतिम तिथि 25 सितंबर दे रखी थी। अफसरों ने फोन पर कहा कि फाटक बंद हो चुकी है, आप आरआेबी को यातायात के लिए खोल दो तो हमने खोल दिया। - आशीष अग्रवाल, शिवशक्ति एंटरप्राइजेज
सांगरिया रेलवे आेवरब्रिज एक नजर में
रेलवे फाटक संख्या 208 ए
ओवरब्रिज की मूल लागत 6 करोड़ रुपए
बढ़ी हुई लागत 11.50 करोड़ रु
कब शुरू हुआ निर्माण कार्य 2008-09 में
निर्माण ने गति पकड़ी 2010-11 में
रोजाना कितनी ट्रेनें 40 पेयर
कितने घंटे बंद रहती थी 7 घंटे
निर्माण एजेंसी- बॉर्डर रोड ऑर्गेनाइजेशन (बीआरआे) व शिवशक्ति एंटरप्राइजेज
क्या फायदा
जयपुर-जैसलमेर रोड को जोड़ने वाली इस रिंग रोड पर फाटक बंद रहने के समय दोनों तरफ एक किलोमीटर लंबा जाम लगता था, इससे निजात मिलेगी। इस मार्ग से रोजाना 38 हजार वाहनों का आवागमन सुगम होगा।
फोटो- सांगरिया ओवरब्रिज से गुजरते ट्रक।