झुंझुनूं . आरसीएचओ डॉ. दयानंद सिंह ने बताया कि वैसे तो डी-वर्मिंग के लिए दी जाने वाली दवा एलबेंडाजोल का कोई साइड इफेक्ट नहीं हैं। लेकिन दवा लेने के बाद अगर बच्चे को हल्का पेट दर्द, मितली, उल्टी, दस्त या थकान महसूस हो तो घबराने की जरूरत नहीं है।
ऐसा दवा के असर से पेट में मौजूद कृमि के मरने से होता है। उन्होंने बताया कि अभियान के दौरान करीब 90 हजार बच्चों को स्कूलों में तथा लगभग 1 लाख 25 हजार बच्चों को आंगनबाड़ी केंद्रों पर डी-वर्मिंग की दवा एलबेंडाजोल देने का लक्ष्य है।
ऐसा हो तो यह करें
सीएमएचओ डॉ. एसएन धौलपुरिया ने बताया कि डी-वर्मिंग की दवा एलबेंडाजोल का साइड इफेक्ट अस्थायी है। ऐसा होने पर बच्चे को छायादार जगह पर सुला दें। पीने के लिए साफ पानी दें। बच्चे को निगरानी में रखें।
स्कूल में दवा देने के दौरान ऐसा होता है तो नजदीकी सरकारी अस्पताल / एएनएम को सूचित करें और सहायता मांगें। गोली लेते वक्त अगर गले में अटक जाए तो बच्चे को छाती के बल गोद में लेटायें और सिर को नीचे लटकने दें। अपनी हथेली से उसकी पीठ थपथपाएं ताकि गोली गले से बाहर जाए।
कौन नहीं ले दवा
आरसीएचओ डॉ. दयानंद सिंह ने बताया कि अगर कोई बच्चा मिर्गी, लंबे समय से मलेरिया या फिर किसी अन्य बीमारी से पीड़ित हाे तो उसे डी-वर्मिंग की दवा नहीं देनी चाहिए। इसी तरह अगर किसी महिला को तीन माह से कम का गर्भ हो तो वह भी यह दवा नहीं ले। इससे गर्भपात का या गर्भस्थ शिशु को खतरा हो सकता है।