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स्क्रीन नहीं दिखाती बस की लोकेशन

7 वर्ष पहले
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^व्हीकल ट्रैकिंग सिस्टम लगाने के कुछ समय बाद से ही खराब पड़ा है। डिपो में तकनीकी कर्मचारी उपलब्ध नहीं है। संबंधित फर्म को सूचना भेज दी गई है। हर महीने मुख्यालय को भी रिपोर्ट भेज रहे हैं। इसे दुरुस्त करने के लिए जयपुर से ही टीम आएगी। -दिनेश शर्मा, मुख्यप्रबंधक, झुंझुनूं आगार

झुंझुनूं. रोडवेजडिपो पर लगा ऑनलाइन सिस्टम का डिस्पले बोर्ड

भास्कर न्यूज | झुंझुनूं

लंबेरूट की बसों की लोकेशन बताने के लिए शहर के रोडवेज बस स्टैंड पर लगाया व्हीकल ट्रैकिंग सिस्टम धूल फांक रहा है। तकनीकी जानकारी नहीं होने के चलते लाखों रुपए की लागत वाला सिस्टम छह महीने भी सही काम नहीं कर सका। यात्रियों को बसों की सही लोकेशन का पता नहीं चल पा रहा ऐसे में कई बार यात्रियों उनके परिजनों को घंटों इंतजार करना पड़ता है।

सूत्रों के अनुसार बसों की लोकेशन के लिए पूरे प्रदेश में व्हीकल ट्रैकिंग सिस्टम लगाए गए थे। डिपो की हर बस को डिवाइस के जरिए सिस्टम से जोड़ा गया था। बसों की लोकेशन यात्रियों को बताने के लिए डिपो परिसर में डिस्प्ले बॉक्स में बड़ी एलसीडी लगाई गई थी। इस सिस्टम के जरिए डिपो से गुजरने वाली हर बस की लोकेशन स्क्रीन पर दिखाई जाती थी। कौन-सी बस फिलहाल किस लोकेशन में है और उसे डिपो तक पहुंचने में कितना समय लगेगा, यह सब स्क्रीन पर दिख जाता था। तकनीकी गड़बड़ी के चलते कुछ ही महीनों बाद सिस्टम नकारा हो गया। कंट्रोल रूप में पड़े सर्वर सिस्टम डिस्प्ले पर धूल चढ़ गई।

रातको होती है ज्यादा परेशानी

झुंझुनूंशहर में रात के समय ऑटो की सुविधा के बराबर है। बस डिपो की इर्द-गिर्द मुश्किल से ही ऑटो रिक्शा मिल पाते हैं। अगर कोई मिल भी जाता है तो वह किराये का 10 गुणा भाड़ा मांग बैठता है। ऐसे में रात के समय आने वाली यात्री को लेने के लिए परिजन अपने साधन लेकर बस डिपो पहुंच जाते हैं। बस की लोकेशन के लिए परिजन बार-बार इन्क्वायरी विंडो के चक्कर लगाते हैं लेकिन वहां भी उन्हें कोई पुख्ता जवाब देने वाला नहीं मिलता। कई बार परिजन इंतजार करके लौट जाते हैं। उसके बाद यात्री डिपो पर पहुंचता है।