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डिस्कॉम के लाइनमैन ने जीएसएस को बनाया हरा-भरा उद्यान

6 वर्ष पहले
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झुंझुनूं। प्रकृति प्रेम देखना है तो इस्माइलपुर जाइए। वहां बीरबलसिंह चौहान मिलेंगे। अन्ना हजारे से प्रेरित बीरबल गांव और प्रकृति को समर्पित हो गए। यूं तो वे लाइनमैन हैं। इस्माइलपुर के जीएसएस पर ड्यूटी करते हैं। इस कर्मभूमि में उनका प्रकृति प्रेम साक्षात होता है।

इस्माइलपुर गांव से करीब एक किलोमीटर दूर स्थित 33/11 सब स्टेशन बाहर से किसी बगीचे जैसा दिखता है। इसके अंदर का नजारा तो और भी सुरम्य है। मुख्य द्वार से प्रवेश करने पर रास्ते के दोनों ओर छायादार पेड़ों की कतारें आपका स्वागत करती हैं। अंदर जाने पर इसी गांव के बाशिंदे बीरबल सिंह चौहान से मुलाकात होगी तो किसी पौधे की देखरेख करते मिल जाएंगे। वे करीब 10 साल से यहां बतौर लाइनमैन सेवारत हैं। सरकारी नौकरी के साथ-साथ वे आठ-नौ घंटे प्रकृति की सेवा में रहते हैं।

कहते हैं आदमी बिना किसी स्वार्थ के कोई काम नहीं करता। बकौल बीरबल, प्रकृति प्रेम के पीछे उनका बहुत बड़ा स्वार्थ है और वह है स्वास्थ जीवन। उनका कहना है कि जितना प्रकृति के नजदीक रहेंगे स्वस्थ रहेंगे।

अन्ना हजारे है प्रेरणास्रोत

बीरबल बताते हैं कि कुछ साल पहले उनका झुकाव राजनीति की ओर हुआ। एक बार अन्ना हजारे के गांव रालेगण सिद्धि जाना हुआ। देखा कि वहां के लोग रोटी, कपड़ा, बिजली, पानी जैसी मूलभूत सुविधाओं के लिए सरकार का मुंह नहीं ताकते हैं। बकौल बीरबल इसी से वे प्रेरित हुए और राजनीति छाेड़ उनका रुख प्रकृति और जनसेवा की ओर हो गया। उसी प्रेरणा की एक झलक है इस्माइलपुर का 33/11 सब स्टेशन।

बीरबल सिंह की मानें तो उन्होंने अपनी जमा पूंजी का कुछ हिस्सा ग्राम विकास के लिए समर्पित कर दिया। गांव में विकास कार्य कराने के मकसद से पृथ्वीराज ग्राम विकास समिति इस्माइलपुर का गठन किया हुआ है। बीरबल सिंह ने अपनी जमा पूंजी के 35 हजार रुपए इस समिति को समर्पित कर गांव के विकास में सहभागी हाेने का दायित्व अदा किया है। उनका कहना है कि दूसरे गांवों में भी ऐसी कमेटियां बनें तो ग्राम विकास के लिए सरकार का मुंह नहीं ताकना पड़ेगा।

जीएसएस में पौधों की सार-संभाल में जुटा बीरबल।

इस्माइलपुर 33/11 सब स्टेशन पर विकसित बगीचे में मौसमी, लेसवा, तीन तरह के नींबू, बील, बेर, किन्नू, संतरा आदि फलदार, फूलदार छायादार काफी पेड़ पौधे फलफूल रहे हैं। ये पेड़ पौधे आय का स्रोत भी बने हुए हैं और भूजल रीचार्ज का जरिया भी। फलों को बेचने से होने वाली आय भी पृथ्वीराज ग्राम विकास समिति इस्माइलपुर के खाते में जमा करा दी जाती है ताकि पैसा ग्राम विकास में काम सके।