झुंझुनूं. नगर पालिका ने प्रशासन शहरों के संग अभियान के तहत स्वविवेक के तहत दी छूट का गलत फायदा उठाकर 490 बीघा कृषि भूमि का फर्जी नियमन कर दिया। इससे पालिका को करीब 3.38 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ।
इसका खुलासा पूर्व ईओ रामकुमारसिंह आर्य की जांच रिपोर्ट से हुआ है। रिपोर्ट एसीबी को भेजी गई थी। पत्र डीएलबी को भी भेजा गया था। पूर्व पालिकाध्यक्ष रिछपाल सैनी ने मुख्यमंत्री कार्यालय में शिकायत की थी जिसकी जांच आर्य ने की थी।
यह होता "सुओमोटो' : दो जून को भेजे पत्र के अनुसार राजस्थान उच्च न्यायालय ने 90 की धारा में सुओमोटो के तहत कार्यवाही करने के निर्देश दिए थे। इसके तहत कृषि भूमि पर अनधिकृत रूप से बसी गैर आवासीय कॉलोनी जो 17 जून 1999 से पूर्व अस्तिव में चुकी हो और जिसमें 50 प्रतिशत से अधिक निर्माण कर आवासीय उपयोग हो रहा हो, का राज्य सरकार के कंसल्टेंट के माध्यम से सर्वे करवाकर ले आउट प्लान का अनुमोदन होना था।
इसके बाद मूल खातेदारों को धारा 90 के तहत नोटिस जारी किए जाते, इसके सात दिवस बाद खातेदार के समस्त अधिकार संबंधित भूमि पर से हटा निकाय हक में नामांतरण प्राधिकृत अधिकारी द्वारा आदेश दिए जाते। लेकिन 17 जून 1999 के बाद अस्तिव में आई कॉलोनियों की कार्यवाही सुओमोटो के तहत नहीं की जा सकती।
ऐसी कॉलोनियों के खातेदार को नोटिस दिया जाता है और खातेदार आवेदन करता है। आवेदन शुल्क नियमन राशि का 10 प्रतिशत पालिका कोष में जमा होता है।
लेऑउट प्लान को एंपावर्ड कमेटी में रखा जाता है। लेकिन पालिका ने नियमों को ताक में रख करीब 50 कॉलोनियों की 90 की कार्यवाही सीधे ही कर दी। कई कॉलोनियां ऐसी हैं जो दो साल पहले ही काटी गई। तत्कालीन ईओ रणजीत गोदारा पालिकाध्यक्ष रहीसा बानो नियमों के अनुसार कार्यवाही करते तो पालिका को 3.38 करोड़ रुपए का राजस्व नुकसान नहीं उठाना पड़ता। जितनी भी कॉलोनियों की 90 की, निशुल्क की गई। इन कॉलोनियों में सुविधा क्षेत्र भी नहीं छोड़ा गया। ईओ चेयरमैन ने इन कॉलोनियों में पट्टे भी जारी कर दिए।
करोड़ों रुपए के भ्रष्टाचार की शिकायत मुख्यमंत्री कार्यालय में की गई थी। ईओ रामकुमारसिंह आर्य ने जांच रिपोर्ट तैयार कर डीएलबी एसीबी को भेजी थी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। अगर गबन की जांच नहीं हुई तो कोर्ट की शरण में जाना पड़ेगा। -रिछपालसैनी, पूर्वपालिकाध्यक्ष नगरपालिका, नवलगढ़