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खेतड़ी में छह माह से नहीं बनाए जा रहे ड्राइविंग लाइसेंस

7 वर्ष पहले
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खेतड़ी| कर्मचारियोंके अभाव में खेतड़ी का परिवहन कार्यालय सफेह हाथी बनकर रह गया है। काम की आस में जो भी व्यक्ति इस कार्यालय में आता है, उसे निराश ही लौटना पड़ता है।

वर्तमान समय में इस कार्यालय में दो इंस्पेक्टर, चार लिपिक, दो कम्प्यूटर आॅपरेटर, आठ गार्ड तथा एक चतुर्थ श्रेणी का पद स्वीेकृत हैं। लेकिन कार्यालय में एक कम्प्यूटर आॅपरेटर तथा एक इंस्पेक्टर ही कार्यरत हैं। दोनों में से एक भी जरूरी काम से छुट्‌टी पर चला जाता है तो कोई भी काम नहीं हो पाता है। कभी कभार तो जब दोनों ही छुट्‌टी पर होते हैं तो कार्यालय के ताला लगा हुआ मिलता है। स्टाफ लगाने की मांग को लेकर क्षेत्र के लोग अनेक बार विरोध प्रदर्शन कर चुके हैं। जिला मुख्यालय से भी जल्द स्टाफ लगाने का आश्वासन दिया जाता है। लेकिन धरातल पर स्थिति जस की तस है। ऐसा नहीं है कि इस कार्यालय से सरकार को राजस्व नहीं मिलता है। सूत्रों के मुताबिक टीपी, टैक्स तथा लाइसेंस फीस के नाम पर हर तीन माह में करीब ढाई से तीन करोड़ रुपए का राजस्व मिलता है जो जिला परिवहन कार्यालय के बराबर है। लेकिन पिछले छह माह में स्टाफ नहीं होने के कारण सारे काम बंद होते जा रहे हैं। अधिकांश समय कार्यालय बंद रहने से परेशान लोग अब झुंझुनूं जाने लगे हैं।

पिछले छह माह से ड्राइविंग लाइसेंस बनना भी बंद हो जाने से क्षेत्र के लाेग परेशान हैं। पालिका अध्यक्ष सीताराम वर्मा ने आरोप लगाया कि जिला परिवहन कार्यालय साजिश के तहत इस कार्यालय को बंद करना चाहता है। कर्मचारियों की कमी काे लेकर परिवहन मंत्री से बात कर समाधान कराया जाएगा। उधर, इंस्पेक्टर भंगवानसिहं ने बताया कि कम्प्यूटर, प्रिंटर खराब पड़े हैं। इस संबंध में जिला मुख्यालय को लिखा गया है। समाधान नहीं हो रहा है जिस कारण लाइसेंस बनाने का काम बंद पड़ा है।

दूसरे कार्यालय हो चुके हैं क्रमोन्नत

खेतड़ीका उपपरिवहन कार्यालय वर्ष 2006 में खुला था। उसी समय नीमकाथाना, डीडवाना, ब्यावर सहित अनेक स्थानों पर लोगों की सुविधाओं के लिए उपपरिवहन कार्यालय खोले गए थे। इसी साल खुले अन्य कार्यालय क्रमोन्नत होकर परिवहन कार्यालय बन चुके हैं। खेतड़ी उपपरिवहन कार्यालय में सुविधा बढ़ने की बजाय कम हुई हैं। मामले को लेकर भाजपा नेता धर्मपाल गुर्जर ने बताया कि आज तक किसी भी जनप्रतिनिधि ने इस कार्यालय की और ध्यान नहीं देने से इसकी यह दुर्दशा हुई ह