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सरकार ने फसली ऋण का 20 फीसदी बजट घटाया झुंझुनूं के 20 हजार किसानों को नहीं मिलेगा ऋण
राज्यसरकार ने पिछले महीने गुपचुप तरीके से किसानों को मिलने वाले फसली ऋण की राशि में कटौती कर डाली, जिससे जिले के करीब 20 हजार किसानों के सपनों पर चोट पहुंची है। कटौती के आदेश जारी होते ही सेंट्रल कोऑपरेटिव बैंक ने ऋण वितरण पर कैंची चलानी शुरू कर दी है। इसके तहत अकेले झुंझुनूं जिले में अब किसानों को फसली ऋण के रूप में 116 करोड़ रुपए कम मिलेंगे।
आदेशों से सीधे तौर पर जिले के 20 हजार किसान ऋण से वंचित हो जाएंगे। इसका असर मार्च के बाद नजर आएगा। इससे पहले सरकार हिस्सा राशि छह से बढ़ाकर नौ फीसदी कर चुकी है। जिससे किसानों की जेब पर पहले ही अनावश्यक भार पड़ चुका है। अब ऋण पर कैंची चलाने से किसानों की कमर ही टूट जाएगी। हालांकि बैंक के लिए भी यह मुश्किल हो गया है कि वह ऋण लेने वाले किसानों की संख्या कम करे या फिर उन्हें दी जाने वाली राशि में कटौती करे। बहरहाल दोनों ही परिस्थतियों में किसान प्रभावित होगा। किसानों की संख्या कम करेंगे तो 20000 किसान ऋण से वंचित हो जाएंगे और ऋण राशि कम करेंगे तो जिले में सोसायटियों से जुड़े सभी 1.5 लाख किसान प्रभावित होंगे।
ऋण राशि वितरण टारगेट में कटौती के आदेश मिले हैं। जिसके तहत जिले में 116 करोड़ की कटौती की गई है। हालांकि आदेश आने से पहले तक हमने टारगेट से 67 करोड़ रुपए अधिक ऋण का वितरण कर चुके। 31 मार्च तक जमा नहीं करने वाले किसानों से इसके बाद ब्याज वसूला जाएगा। -शीशराम, प्रबंध निदेशक, झुंझुनूं केंद्रीय सहकारी बैंक
हिस्सा राशि भी 3% बढ़ाई
कृषिऋण में कटौती की घोषणा कर सरकार ने किसानों पर दोहरी मार दी है। पहले कृषि ऋण पर हिस्सा राशि बढ़ा दी। किसानों को ऋण देने से पहले ग्राम सेवा सहकारी समिति का सदस्य बनने के लिए हिस्सा राशि कुल ऋण राशि का छह फीसदी लिया जाता था, जिसे अब बढ़ाकर नौ फीसदी कर दिया। यानी किसान की जेब पहले ही ढीली हो चुकी है। इसके बाद सरकार ने ऋण राशि में बीस प्रतिशत की कटौती कर किसान को परेशानी में डाल दिया है।
इसतरह होगा नुकसान
{कटौतीके बाद बैंक को तय करना होगा कि वे किसानों की संख्या में कटौती करें या उन्हें दी जाने वाली राशि कम करें।
{प्रति हैक्टेयर खेती में करीब 15 हजार रुपए का खर्च आता है। कम ऋण मिलने से किसान की खेती प्रभावित होगी।
{बैंकों में ऋण राशि की कटौती के कारण किसान ऊंची ब्याज दर पर निजी स्तर पर ऋण लेने के लिए मजबूर होंगे। किसानों की चिंता बढ़ी अब कैसे करेंगे खेती।
कटौती का दंश | पांचलाख में से एक लाख किसान प्रभावित
जिलेमें करीब पांच लाख से ज्यादा किसान है। इनमें से करीब एक लाख किसान सामान्य वर्ग के हैं, जो ऋण नहीं लेते। बाकी किसान हर बार फसल बुवाई के लिए कहीं कहीं से ऋण लेते हैं। सैंट्रल कोऑपरेटिव बैंक के आंकड़ों की बात करें तो हर साल बैंक से करीब एक लाख पांच हजार किसान ऋण लेते हैं। कटौती के आदेशों के बाद जिले में बीस हजार से ज्यादा किसानों पर सीधा-सीधा असर पड़ेगा।
मौसमकी मार | खराबेका सर्वे हुआ, लेकिन नहीं मिला मुआवजा
पिछलेसाल किसानों को मौसम की बड़ी मार झेलनी पड़ी। अगस्त- सितंबर महीने में बरसात नहीं होने से किसानों को काफी नुकसान हुआ था। सरकार ने जब इसका प्रारंभिक सर्वे कराया तो अलसीसर ब्लॉक में 53 गांवों के 42690 किसानों का खराबा आंका गया था, लेकिन मुआवजे की राशि किसानों को अभी तक नहीं मिल पाई। हालांकि मौसम की मार से पूरे जिले के किसान ही प्रभावित हुए थे।
टारगेट से बांट दिया ज्यादा, अब वसूली शुरू
जिलेमें कटौती के आदेश देरी से मिलने के कारण किसानों को पूर्व में तय टारगेट के आधार पर ही ऋण वितरण कर दिया गया। जब तक संशोधित आदेश मिले तब तक जिले में 531 करोड़ रुपए का ऋण बांटा जा चुका था। जबकि 464 करोड़ रुपए ही बांटने थे। आदेश मिलने के बाद बैंक ने 31 मार्च तक वसूली अभियान शुरू कर दिया है। किसानों को लालच दिया जा रहा है कि वे 31 मार्च तक अपना ऋण जमा करवा दें, उन्हें अप्रेल में फिर से ऋण दे दिया जाएगा। मगर अप्रेल में किसान को मिलना कुछ नहीं है।
...और प्रदेश में 3500 करोड़ रु. की कटौती
प्रदेशमें किसानों को पहले 17500 करोड़ रुपए का फसली ऋण वितरित करने का टारगेट था। बैंक से जुड़ी ग्राम सेवा सहकारी समितियों ने दिसंबर से ऋण वितरण का कार्य शुरू भी कर दिया था। मगर इस बीच जनवरी में सरकार ने 20 फीसदी कटौती के आदेश जारी कर दिए। इसके तहत 3500 करोड़ की कटौती हो गई। इससे वितरण टारगेट घटकर 14000 करोड़ रह गया। आदेशों की पालना में झुंझुनूं जिले में 116 करोड़ रुपए की कटौती की गई है।
14000
करोड़ रह गया कटौती के बाद।
17500
करोड़ ऋण का लक्ष्य था प्रदेश में।