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दो दिन पहले मां को फोन पर कहा था-दिवाली पर आऊंगा, लेकिन तिरंगे में लिपट कर आएगा सतीश

4 वर्ष पहले
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सेनाकी चौकियों के लिए केरोसीन की सप्लाई के दौरान हेलीकॉप्टर में लगी आग में जिंदा जल कर शहीद हुआ सतीश मिलनसार, हंसमुख था। पूरे गांव उसे आदर्श के रूप में देखता था। उसकी इच्छा थी कि वह गांव में युवाओं के लिए कोचिंग खोले और सेना में जाने के लिए उन्हें प्रेरित करें। उसने बीएसटीसी किया हुआ था। लेकिन खुद की तैयारी से ही एयरफोर्स में 10 साल पहले भर्ती हो गया था। उसने पाच अक्टूबर को ही मां को फोन किया था कि दीपावली पर रहा हूं, लेकिन रविवार को वह तिरंगे में लिपट कर लौट रहा है।

बहुतपहले उठा गया पिता का साया : सतीशके पिता ताराचंद की मृत्यु काफी समय पहले हो गई थी। उसकी मां अंगूरी देवी ने ही उसे पढ़ाया और लिखाया।

करवा चौथ से दो दिन पहले प|ी किरण की मांग सूनी हो गई। गांव में यह सूचना आते ही शोक छा गया और गमगीन माहौल हो गया। सरपंच सहित गांव के बड़े बुजुर्गों ने शहीद के घर केवल एक्सीडेंट में घायल होने की ही सूचना दी है। समाचार मिलने पर दूर-दराज से शनिवार को आए उनके रिश्तेदारों को भी सूरजगढ़ धर्मशाला में ठहराया। ग्रामीणों के मुताबिक परिवार में सभी महिलाएं ही हैं इसलिए शव आने से पूर्व घर पर सूचना नही दी गई। सतीश ने अपनी मां अंगूरी को 5 अक्टूबर की रात ही फोन पर बताया था कि वह दीपावली पर घर रहा है। सतीश तीन माह पूर्व अपने ताऊ लालचंद के निधन पर करीब बीस दिन की छुट्टी काट कर गया था। परिवार में प|ी, पुत्र सहित वृद्ध मां अंगूरी देवी दो छोटी अविवाहित बहने हैं। तीन बड़ी बहनों की शादी हो चुकी है। मां को अंतिम बार फोन पर सतीश ने कहा था कि छुट्टी पर आऊंगा तब बहनों के रिश्ते के लिए लड़के देखेंगे।

मांअंगूरी देवी ने मजदूरी कर पाला बच्चों को : ग्रामीणोंके अनुसार सतीश के पिता ताराचंद बीमार रहते थे और 2006 में उनकी मृत्यु हो गई थी। परिवार का जिम्मा शुरू से मां अंगुरीदेवी ने उठा रखा था। वह गांव में मजदूरी कर बच्चों पाल पोस कर बड़ा किया। बेटा एयरफोर्स में भर्ती होने के बाद घर की कुछ माली हालत सुधरी थी।

सतीश खांडा

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