झुंझुनूं. पुलिस विभाग जिला मुख्यालयों पर
मोबाइल फोरेंसिक साइंस लैब (एफएसएल) देने की तैयारी में है। इसके बाद एफएसएल जयपुर में होने वाली कुछ गंभीर जांचें जिला मुख्यालय पर ही होने लगेंगी तो अपराध अनुसंधान में भी तेजी आएगी।
गौरतलब है कि चालू वर्ष में जनवरी से नवंबर 2014 तक जिले के करीब 200 से ज्यादा मामलों में तफ्तीश सिर्फ इसलिए रुकी हुई / धीमी है क्योंकि उनकी विसरा रिपोर्ट एफएसएल जयपुर से नहीं मिली है। इनमें कई मामले तो एक साल से भी ज्यादा पुराने हैं। पुलिस महानिरीक्षक जयपुर रेंज धर्मचंद जैन ने बताया कि कुछ डिविजनल मुख्यालयों पर तो एफएसएल चुकी हैं।
जिला स्तर पर भी एफएसएल स्थापित करने की तैयारी चल रही है। लेकिन इससे पहले प्रथम चरण में यह प्रयास किया जा रहा है प्रत्येक जिले में बहुत जल्द मोबाइल लैब हो। हालांकि जिला मुख्यालय पर पुलिस लाइन में एक मिनी फोरेंसिक लैब संचालित है। घटनास्थल पर दीवार, फर्श या अन्य किसी चीज पर लगे लाल धब्बे खून के हैं या नहीं, दुर्घटना के मामले में गाड़ी के चेसिस या इंजन नंबर बदले गए हैं या नहीं आदि छोटी-मोटी जांचें ही इस लैब में हो पाती हैं। विसरा जांच के लिए तो स्थानीय पुलिस को एफएसएल जयपुर का ही मुंह ताकना पड़ता है।
मोबाइल लैब आने से वारदात के तुरंत बाद अधिकांश जरूरी जांचें मौके पर ही की जा सकें और एफएसएल रिपोर्ट के इंतजार में होने वाली देरी से बचा जा सके। इससे पुलिस तफ्तीश में रुकावट पैदा नहीं होगी।
जिला मुख्यालयों पर मोबाइल एफएसएल होंगी तो जयपुर स्थित एफएसएल पर जांच का भार भी कम हो जाएगा इससे गंभीर मामलों में जांच रिपोर्ट भी जल्द सकेंगी। उल्लेखनीय है कि जयपुर में प्रदेश की एक मात्र बड़ी लैब होने से अधिकांश जिलों से जांच के लिए विसरा / नमूने वहीं जाते हैं। और वहां फ़र्स्ट इन फ़र्स्ट आउट (फीफो) मैथड पर काम होने से नंबर आने पर ही जांच होती है। इसीलिए रिपोर्ट मिलने में देरी होती है।