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चेक बाउंस के मामले में भाजपा नेता को 1 साल जेल, 65 लाख का जुर्माना

4 वर्ष पहले
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मुकदमे के दौरान हो गया था केडिया का निधन

न्यायालयमें प्रकरण चलने के दौरान ही कन्हैयालाल केडिया की 2 जनवरी, 2013 को निधन हो गया था। इस मामले को उनके वारिसों ने जारी रखा।

पुलिसतक पहुंचा था मामल |आबूसरिया ने 2 अप्रैल 2001 को केडिया के खिलाफ कोतवाली में रिपोर्ट दी थी कि उसने केडिया को खुद का खाता बंद करवाने के लिए खाली चेक दिया था। इस पर केडिया ने राशि लिख ली थी। पुलिस ने एफआर लगा दी थी।

भास्कर न्यूज | झुंझुनूं

चेकबाउंस होने के 16 साल पुराने एक मामले में एसीजेएम मुकेश सोनी ने शहर के एक भाजपा नेता कारोबारी को एक साल की सजा 65 लाख रुपए का जुर्माना लगाया है। सक्षम कोर्ट में अपील के लिए एक माह का समय देते हुए जमानत दे दी।

मामले के अनुसार 1994 में अोमप्रकाश आबूसरिया और कन्हैयालाल केडिया ने मिल कर एक जनवरी 1994 को ओम कंस्ट्रक्शन कंपनी के नाम से साझेदारी फर्म बनाई थी। इस फर्म ने 30 जून 1998 तक काम किया। इनकी पंचवटी धर्मकांटा पंचवटी स्टोन क्रेशर के नाम से भी साझेदारी फर्म थी। दोनों ने 30 जून 1998 को अलग होने का फैसला किया। इस दौरान एक एमओयू किया जिसके तहत फर्म अोमप्रकाश आबूसरिया के पास रहनी थी और कन्हैयालाल केडिया को इसके बदले 70 लाख रुपए दिए जाने थे। इस पर आबूसरिया ने केडिया को विजया बैंक की जयपुर शाखा का 35 लाख रुपए का चेक 13 मार्च 2001 को दिया। यह चेक खाते में पर्याप्त राशि होने के कारण बाउंस हो गया।

इस पर केडिया ने 2 अप्रैल, 2001 को आबूसरिया को नोटिस दिया। भुगतान नहीं करने पर केडिया ने 25 अप्रैल 2001 को मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के यहां परिवाद पेश किया। न्यायालय ने प्रसंज्ञान लिया। यह मुकदमा इसी साल 7 जून को मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत से एसीजेएम की अदालत में स्थानांतरित हुआ। अदालत ने एडवोकेट मनोज कुमार शर्मा की दलीलों को स्वीकार करते हुए आबूसरिया को एक साल के कारावास 65 लाख रुपए के जुर्माने की सजा सुनाई। एसीजेएम ने आरोपी को अपील करने एक माह का समय देते हुए जमानत पर छोड़ा।

^मैंइस फैसले के खिलाफ सक्षम न्यायालय में अपील करूंगा, भले ही सुप्रीम कोर्ट जाना पड़े। यह सब तथ्यों के विपरीत है। -ओमप्रकाश आबूसरिया

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