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ओसियां से चोरी हुईं 12वीं सदी की तीन मूर्तियां मथुरा में बरामद

8 वर्ष पहले
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जोधपुर। ओसियां कस्बे में स्थित पीपलाज माताजी के मंदिर से गत फरवरी में चोरी हुई तीन प्राचीन मूर्तियां ग्रामीण पुलिस ने मथुरा (उत्तरप्रदेश) से बरामद की हैं। मथुरा पुलिस और एसओजी की मदद से मिली बारहवीं सदी की इन मूर्तियों की कीमत अंतरराष्ट्रीय बाजार में करोड़ों रुपए है। इस प्रकरण में पुलिस दो आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है, जबकि एक अन्य आरोपी की मूर्तियों की वजह से ही गिरोह के अन्य सदस्यों ने हत्या कर दी थी।

एसपी (ग्रामीण) राहुल प्रकाश ने बताया कि गत 11 फरवरी की देर रात ओसियां कस्बे में स्थित पीपलाज माताजी मंदिर से गणेशजी, कुबेरजी और शांडिल्य सेवगों की कुलदेवी पीपलाज माताजी की भारी भरकम मूर्तियां चोरी हो गईं थीं। बारहवीं सदी की इन मूर्तियों की खुले मंदिर में ही पूजा-अर्चना होती थी। इस संबंध में मंदिर के पुजारी हुकमदास की रिपोर्ट पर ओसियां थाने में प्रकरण दर्ज किया गया।

पुरा महत्व की इन मूर्तियों की तलाश के लिए ओसियां वृत्ताधिकारी रिछपालसिंह व थानाधिकारी जुल्फिकार की विशेष टीम गठित की गई। तहकीकात के दौरान इस टीम ने मथुरा के हार्डकोर बदमाश और कुख्यात मूर्ति तस्कर रामवीर चौधरी को गिरफ्तार किया। उसने मूर्तियां चुराना तो स्वीकार कर लिया, लेकिन उन्हें छुपाने के स्थान के बारे में वह कुछ भी नहीं बता रहा था। आरोपी ने बताया था कि मूर्तियां चुराने से पहले वह अपने गिरोह के दस लोगों के साथ जोधपुर आया था। यहां रुकने के बाद दो जने ओसियां में रैकी करने के लिए भी गए।

खुले मंदिर को देखने के बाद 11 फरवरी की रात गिरोह के सदस्य एक मिनी ट्रक लेकर ओसियां पहुंचे और तीन से साढ़े तीन फीट लंबी और तकरीबन 70 से 85 किलो वजनी प्रत्येक मूर्ति को उठाकर मिनी ट्रक में डाला। वहां से बदमाश सीधे मथुरा पहुंचे और एक खाली प्लॉट में खुदाई कर तीनों मूर्तियों को छुपा दिया था।

वारदात में प्रयुक्त मिनी ट्रक के नंबरों के आधार पर ग्रामीण पुलिस ने प्रदेश के तमाम जिलों की पुलिस को सूचना भिजवाई। करीब पांच दिन पहले ही जयपुर के डीग थाना पुलिस ने सूचना दी कि वह मिनी ट्रक पकड़ा गया है। ओसियां पुलिस की टीम ने मिनी ट्रक जब्त कर उसके चालक को गिरफ्तार किया। उससे पूछताछ में मूर्तियां छुपाने के स्थान का पता लगा। आखिरकार, गुरुवार को ग्रामीण पुलिस उसे लेकर मथुरा पहुंची। वहां स्थानीय पुलिस और एसओजी की मदद से तीनों प्राचीन मूर्तियां बरामद कर ली।

मूर्ति के लिए अपने ही साथी की हत्या
पुलिस के अनुसार मूर्ति चोर गिरोह के सदस्य रामवीर चौधरी का अपने साथी मथुरा के दूसरे हिस्ट्रीशीटर भगवानसिंह के साथ इन मूर्तियों को लेकर विवाद हो गया था। प्रारंभिक पूछताछ में पता लगा कि रामवीर ने अपने साथियों के साथ मिलकर भगवानसिंह की हत्या कर दी थी। इसी वजह से वह मूर्तियां छुपाने की बात भगवानसिंह पर ही डालता रहा।