जोधपुर. नगर निगम ने मंगलवार से बकाया नगरीय विकास कर (यूडी टैक्स) नहीं चुकाने वाली निजी स्कूलों को सीज करने का अभियान शुरू कर दिया है।
निगम की टीम पहले दिन शहर की तीन निजी स्कूलों- ब्रह्मबाग स्थित सरदार स्कूल, चीरघर रोड स्थित मौलाना अबुल कलाम आजाद स्कूल और प्रतापनगर पुलिस थाने के समीप कोणार्क स्कूल को सीज करने पहुंची तो संचालकों ने बकाया यूडी टैक्स की राशि का चेक देने से इनकार कर दिया।
टीम के सदस्य जब स्कूल सीज करने लगे तो दो स्कूल संचालकों ने तत्काल चेक काट कर टीम को सौंप दिए। सरदार स्कूल के संचालकों ने बकाया यूडी टैक्स की राशि जमा करवाने से इनकार कर दिया तो निगम की टीम ने स्कूल को सीज कर दिया। आयुक्त हरिसिंह राठौड़ के आदेश पर पहली टीम उपायुक्त देवाराम सुथार के नेतृत्व में चीरघर स्थित मौलाना अबुल कलाम आजाद स्कूल पहुंची। निगम टीम ने स्कूल में बकाया करीब 49 लाख रुपए यूडी टैक्स का नोटिस थमाया आैर सीज करने की कार्रवाई शुरू की, लेकिन स्कूल संचालकों ने महापौर से मिलने के बाद चेक काटने की बात की।
महापौर ने भी बकाया टैक्स जमा करवाने की शर्त पर कार्रवाई रोकने की बात कही। संचालकों ने 5 लाख का चेक टीम को सौंप दिया। शेष राशि भी जमा करवाने का आश्वासन दिया, तब टीम रवाना हुई। फिर टीम प्रतापनगर थाना के समीप कोणार्क स्कूल पहुंची। यहां संचालकों ने 6.11 लाख रुपए के चेक काट कर जमा करवा दिए। राजस्व अधिकारी सुमन राठौड़ के नेतृत्व में दूसरी टीम ब्रह्मबाग स्थित सरदार स्कूल पहुंची। उनके साथ राजस्व निरीक्षक निरंजन चौधरी व रामकुमार जावा भी थे।
टीम ने आधे घंटे तक कार्रवाई नहीं की, बाद में जब यूडी टैक्स जमा करवाने से इनकार कर दिया गया तो स्कूल के ऑफिस व पांच गेट पर ताला लगा कर सीज कर दिया। कुछ देर बाद स्कूल संचालक दो लाख रुपए का चेक लेकर निगम पहुंचे। बाद में आयुक्त ने स्कूल को सीज मुक्त कर दिया।
न्याति नोहरों को सामाजिक समरसता का प्रतीक मान मुक्त किया था, यही नजरिया इन स्कूलों के लिए भी हो
निगम के पिछले कांग्रेस बोर्ड ने आजादी से पहले स्थापित न्याति नोहरों को आधुनिक मैरिज प्लेसेज की श्रेणी में मानते हुए शुल्क लगा दिया था। समाज विरोध में खड़े हुए और इन्हें सामाजिक समरसता का प्रतीक बताया, जहां अमीर-गरीब सभी अपने आयोजन करते हैं।
निगम को बात समझ आई तो आदेश वापस ले लिए। इसी तरह समाज के स्कूल भी गरीबों व शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए स्थापित हुए थे। इनके लिए तत्कालीन राजघरानों ने निशुल्क या नाममात्र राशि पर जगह उपलब्ध करवाई थी। इनमें आज भी कई जरूरतमंद बच्चों को निशुल्क शिक्षा मिल रही है, फीस भी बहुत कम है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि ऐसी स्कूलों से बाजार दर पर टैक्स वसूली क्या उचित है?
नियम- चेरिटेबल ट्रस्ट की स्कूल, संपत्ति कर मुक्त
राज्य सरकार ने 29 अगस्त 2007 को एक अधिसूचना जारी करते हुए राजस्थान नगर पालिका अधिनियम की धारा 107 द्वारा दी गई प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग चेरिटेबल ट्रस्ट की समस्त संपतियों को (वाणिज्यिक गतिविधियों सहित) कर मुक्त कर दिया गया था, लेकिन इसमें कहा गया था कि कर मुक्त करते समय उक्त भूमि या भवन चेरिटेबल ट्रस्ट है, इसके समुचित कारण विद्यमान हो। इसमें यह भी शामिल था कि अगर कोई शैक्षणिक संस्था राज्य सरकार द्वारा विशेष आदेश द्वारा कर मुक्त की गई है तो उनसे कर नहीं वसूला जाए।
रियायत- कांग्रेस सरकार ने 5 साल तक रोके रखी थी वसूली
स्वायत्त शासन विभाग ने छह साल पहले 8 जनवरी 2010 को सभी निकायों के प्रमुखों व आयुक्तों को एक परिपत्र जारी कर स्पष्ट कर दिया था कि जब तक सरकारी स्तर पर निर्णय नहीं हो जाता, तब तक शैक्षणिक संस्थाओं से यूडी टैक्स की वाणिज्यिक दर से की जा रही वसूली भी स्थगित रखे। इस परिपत्र के बाद राज्य सरकार ने जोधपुर नगर निगम को कुछ फंड जारी कर दिया। ऐसे में पूरे पांच साल कोई वसूली नहीं हुई। अब निगम ने सरकार के इशारे पर शैक्षणिक व सरकारी विभागों में बकाया यूडी टैक्स की वसूली शुरू की है।
राहत- नियम के सहारे कोर्ट गए तो मिल गया स्टे
हमें निगम ने 16 लाख यूडी टैक्स का नोटिस भेजा। हमने इसके लिए लीगल एडवाइज ली और कोर्ट में गए। इसमें हमने नगरपालिका अधिनियम 1956 का हवाला देते हुए स्टे लिया। इसमें हमने नगरपालिका अधिनियम 1956 की धारा 104 व 107 का हवाला देते हुए बताया कि इस एक्ट में चेरिटेबल ट्रस्ट द्वारा संचालित शिक्षण संस्थान को यूडी टैक्स से बाहर रखा गया है। न्यायालय ने हमारी दलील और सबूत के आधार पर हमें स्टे दिया है।
इनके करोड़ों बकाया
जेएनवीयू- 33 करोड़ बकाया। निगम ने स्वायत्त शासन विभाग से मार्गदर्शन मांगा तो शासन सचिव ने हरी झंडी दे दी। हालांकि फिलहाल कोर्ट से स्टे।
डिस्कॉम- यूडी टैक्स के 1 करोड़ 18 लाख 73 हजार 967 रुपए बकाया हैं। निगम ने दो बार वसूली के प्रयास किए थे, लेकिन सरकार ने रोक दिया था।
बोझ न पड़े, इसके लिए दो विकल्प
- सरकार जिस अनुदानित दर पर जमीन देती है, उसके आधार पर टैक्स लें।
- समाज के स्कूल परिसर में पैसे लेकर आयोजन होते हैं तो ऐसे आयोजन के लिए अलग से शुल्क वसूला जा सकता है।
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वंचितों, मध्यम वर्ग के परिवारों से आने वाले बच्चों को शिक्षा सुलभ कराने वाली इन सम्मानित संस्थाओं को वसूली के नियमों में छूट मिलनी चाहिए कि नहीं? हां के लिए Y, ना के लिए N लिखकर 8764233320 पर एसएमएस करें।
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