जाेधपुर. विरासत में नगर निगम की ‘दयनीय आर्थिक हालत’ मिलने का बहाना बनाने वाले मौजूदा बोर्ड के पहले बजट से तो शहर को कोई उम्मीद नहीं थी, लेकिन दूसरे बजट में भी शहर को एक भी नई योजना अथवा सुविधाओं के विस्तार का रोडमैप नहीं दिखाया है। जबकि इसी बजट में 16 गांवों की हजारों बीघा जमीन मिलना बताया है।
यह खजाना हाथ लगने के बावजूद बजट में भविष्य की एक भी योजना शामिल नहीं है। एक्सपर्ट्स की मानें तो इन गांवों से ही 500 से 700 करोड़ की आय हो सकती है जो निगम के पूरे एक बजट के बराबर है। एयरफोर्स से भी पैसा मिलना है। यदि सांसद के प्रयासों में दम है तो एयरपोर्ट विस्तार के लिए दी जमीन के बदले करीब 70 करोड़ रुपए मिलेंगे, उसके उपयोग का भी कोई प्लान नहीं है।
बोर्ड की तीसरी कमजोरी राज्य सरकार से पैसा नहीं ला पाने की भी दिख रही है। गत बोर्ड राज्य सरकार से स्पेशल फंड के रूप में 47 करोड़ रुपए लाया था, सड़क, सीवरेज व मेनहोल मरम्मत के लिए। ऐसा प्रयास भी इस बजट में नहीं हैं।
उद्यमियों से भरे जाेधपुर नगर निगम बोर्ड ने गुरुवार को एक तरह से वसूली का बजट पेश किया है।
पिछले साल के टारगेट कितने पूरे हुए, अगले साल के टारगेट क्या हैं, इस बारे में कुछ नहीं है। शहर के लिए कोई नई स्कीम भी नहीं है, साफ-सफाई व सौंदर्यीकरण के काम भी वे ही हैं जो चल रहे हैं। यदि कुछ सुधार किया है तो वह प्रत्येक वार्ड में पार्षद कोष से होने वाले कार्यों का बजट 50 से 80 लाख रुपए तक करने का फैसला है। यह भी इसलिए क्योंकि गत बोर्ड में हर वार्ड में करोड़ों के काम हुए थे, यह उलाहना मौजूदा बोर्ड को अपने ही पार्षदों से सुनना पड़ रहा था।
33 मिनट में 26 पेज का बजट पेश
नगर निगम साधारण सभा ने गुरुवार को वित्तीय वर्ष 2016-17 के लिए 796 करोड़ 10 लाख 9 हजार रुपए का बजट सर्वसम्मति से पारित कर दिया। महापौर घनश्याम आेझा ने मात्र 33 मिनट में ही 26 पेज के बजट प्रस्ताव पढ़ लिए। सवा दो घंटे तक चली बोर्ड बैठक में नगरीय विकास कर (यूडी टैक्स) के मसले पर पक्ष-विपक्ष के पार्षदों में करीब 40 मिनट तक नोकझोंक हुई, लेकिन बजट की प्रति पर किसी भी पार्षद ने नजर नहीं डाली। शेष समय में सिर्फ दस पार्षदों ने ही चर्चा में हिस्सा लिया। इनमें भी चार बजट प्रस्तावों पर चर्चा करने की बजाय अपने वार्ड की समस्याओं पर ही बोले।
- 16 नए गांव निगम क्षेत्र में, म्यूटेशन हुए 6 में ही 250 करोड़ की जमीन, 16 में 5 से 7 अरब रुपए की
बजट में 16 गांव मिलने का जिक्र तो है, लेकिन उसका करेंगे क्या, इसका जिक्र नहीं है। निगम चाहता तो इन गांवों की जमीन को चिह्नित कर आवासीय योजनाएं बनाता। इससे आने वाले समय में लोगों को खुद की छत तो मिलती ही, निगम का खजाना भी भर जाता।
250 करोड़ रुपए की जमीन 6 राजस्व गांवों में निगम चिह्नित भी कर चुका है, शेष 10 की बाकी है।
1000 भूखंड 16 गांव में कम से कम भी होंगे जिनके पट्टे उठेंगे। लाखों रुपए आएंगे।
- इन राजस्व गांवों में ऐसी बेशकीमती जमीन भी शामिल है, जिन पर निगम फार्म हाउस
की स्कीम ला सकता है।
भू-उपयोग परिवर्तन भी 16 गांव की अधिकांश जमीन का होना है, इससे भी बड़ी आय होगी।
गांधी नगर आवासीय योजना में 650 भूखंडों से निगम को 40 करोड़ से ज्यादा की आय हुई थी।
- सैकड़ों बीघा जमीन मिली है तो गांधी नगर की तरह कॉलोनियों का विस्तार कर करोड़ों रुपए अर्जित कर सकता है।
आगे की स्लाइड में पढ़िए बजट में नया सिर्फ यह...