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बावड़ी के किसानों को बिना वजह लटकाया

5 वर्ष पहले
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भूजल का औद्योगिक उपयोग रोकना था बिना पड़ताल 3888 किसानों को भेजे थे नोटिस

जिन्हें गलत भूजल उपयोग से रोकना था, उन्हें तो भूल गए, खेती करने वालों की उड़ा दी रातों की नींद

डार्कजोन के वो 3888 किसान, जिनकी नींद जिला कलेक्टर के एक आदेश ने नींद उड़ा दी थी, उनके लिए शुक्रवार राहत का संदेश लेकर आया, जब नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने भारतीय किसान संघ की ओर से दायर याचिका का निस्तारण करते हुए किसानों के पक्ष में निर्णय किया। एनजीटी चेयरपर्सन जस्टिस स्वतंत्र कुमार सहित पांच जजों की बैंच ने कलेक्टर को नोटिस की पालना करने से पहले परिवादी किसानों का पक्ष सुनने के निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही किसानों को भी निर्देशित किया है कि वे कलेक्टर के समक्ष एक हलफनामा देंगे, जिसमें स्पष्ट अंकित हो कि किसान अपने कुएं के पानी से सिर्फ खेती करेंगे, औद्योगिक उपयोग नहीं। एनजीटी के इस आदेश से पहले से चल रहे 3888 कृषि कनेक्शन के साथ-साथ 13 अगस्त 20111 से पहले के खुदे कुओं पर कनेक्शन का रास्ता भी साफ हो गया है।

उल्लेखनीय है कि गत वर्ष 12 मई को तत्कालीन कलेक्टर ने एनजीटी के एक आदेश की आड़ में जिले के चारों ब्लॉक (मंडोर, ओसियां, भोपालगढ़ बिलाड़ा) जो डार्क जोन की श्रेणी में थे। इनमें आने वाले 3888 कृषि कनेक्शन काटने और ट्यूबवेल सील करने के आदेश जारी कर दिए थे। इस मुद्दे को दैनिक भास्कर ने प्रमुखता से उठाते हुए लगातार पूरे मामले पर नजर रखी। इसके बाद पूरे जिले में किसानों ने आंदोलन किए थे। बाद में भाकिसं ने एनजीटी के समक्ष याचिका दायर की। उसे पूर्व में यूआर बेनीवाल अन्य की ओर से चल रही याचिका में शामिल कर लिया गया।

भाकिसं के आंदोलन प्रमुख तुलछाराम सिंवर ने बताया कि यूआर बेनीवाल अन्य की ओर से जो याचिका थी, उसमें कृषि कनेक्शन की आड़ में औद्योगिक उपयोग करने वालों के खिलाफ कार्यवाही का मुद्दा था। उस मामले में एनजीटी ने औद्योगिक उपयोग को गलत मानते हुए ऐसा करने वालों के खिलाफ कार्यवाही के निर्देश जोधपुर कलेक्टर को दिए थे। तत्कालीन कलेक्टर ने बिना पूरे तथ्यों की पड़ताल किए जिले के चारों ब्लॉक के 3888 किसानों के बिजली कनेक्शन काटने के नोटिस भेज दिए थे। भाकिसं की ओर से अधिवक्ता डॉ. रमनदीप सिंह सिद्धू ने एनजीटी के समक्ष यही बात रखी, कि सभी किसानों को नोटिस भेजना ही गलत था, क्योंकि सभी किसान सिर्फ खेती ही कर रहे हैं। प्रशासन ने एकतरफा कार्यवाही की थी। केंद्रीय भूजल बोर्ड के नोटिफिकेशन की पूर्ण पालना और बोरवेल का उपयोग सिर्फ कृषि प्रयोजन में होने के बावजूद इन्हे नोटिस देना सही नहीं है। इस पर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड राज्य सरकार के अधिवक्ता शिवमंगल शर्मा ने भी सहमति जताई। हैरानी की बात है कि जिला प्रशासन भूजल का औद्योगिक उपयोग करने वालों के खिलाफ तो कोई ठोस कदम ही नहीं उठा पाया था। कलेक्टर को एनजीटी की ओर से जो आदेश मिले थे, उसकी सुनवाई के ठीक दो दिन पहले ही किसानों को नोटिस जारी किए गए थे।

26 मई 2015 को प्रकाशित खबर

15 मई 2015 को प्रकाशित खबर

सबसे पहले भास्कर में 13 मई 2015

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