रीति-रिवाज के अनुसार मांग करना दहेज प्रताड़ना नहीं : सेशन कोर्ट
जिलाएवं सेशन न्यायालय ने दहेज प्रताड़ना के एक मामले में निर्धारित किया है कि समाज के रीति-रिवाजों के अनुसार यदि किसी अवसर पर कोई मांग की जाती है, तो उसे दहेज प्रताड़ना की श्रेणी में नहीं माना जा सकता है। इसके साथ ही अदालत ने आरोपी पति को बरी कर दिया है, जबकि निचली अदालत ने उसे तीन वर्ष के कारावास की सजा सुनाई थी। अदालत ने पति की ओर से पेश अपील को मंजूर करते हुए कहा कि पति के अवैध संबंधों की जानकारी के बावजूद 6 वर्ष की लंबी अवधि तक कोई कार्रवाई नहीं करने से यही माना जाएगा कि प|ी इस क्रूरता से पीड़ित नहीं थी।
अपर मुख्य महानगर मजिस्ट्रेट ने जोधपुर निवासी आरोपी अमित कुमार हरिजन को दहेज प्रताड़ना के आरोप में 5 मार्च 2014 को तीन वर्ष के कारावास की सजा सुनाई थी। इस पर आरोपी के वकील हैदर आगा ने सेशन न्यायालय में इस फैसले को चुनौती दी थी। उनका कहना था कि पुत्र जन्म के बाद बालुंदा (विदाई) के समय ससुराल वालों की ओर से कुछ उपहार देने का रिवाज होता है। इस संबंध में की गई मांग दहेज की मांग की श्रेणी में नहीं आती है। इसके अलावा प|ी ने पहले तो अवैध संबंधों का आरोप लगाया है, लेकिन बाद में सिर्फ अवैध संबंधों का शक जताया गया है। इसके बावजूद प|ी ने छह वर्ष तक कोई कार्रवाई नहीं की, इससे प|ी द्वारा लगाए गए आरोप संदेहास्पद लगते हैं।