अपने जैसे ही दृष्टिहीन मित्र को नहीं मिला लोन तो संघर्ष कर कायदे ही बदलवा दिए
बहुतप्रयास के बावजूद दिव्यांगों को पर्याप्त सुविधाएं मुहैया नहीं हैं। अमर जैन की लड़ाई ऐसे पूरे सिस्टम से है। वे बचपन से देख नहीं सकते, पर जिद ऐसी कि अपने जैसे लोगों को असुविधा हो, इसके लिए बैंकों, कॉलेजों और सरकारी कंपनियों तक के नियम बदलवा दिए। दृष्टिहीनों को बैंक या फाइनेंस कंपनियों से लोन लेने में खासी दिक्कत आती है। वे या तो किसी का सहयोग लें अथवा दूसरे के नाम से लोन लें। अमर ने इसके खिलाफ नेशनल हाउसिंग बैंक के सीईओ श्रीराम कल्याणरमन को ई-मेल किया। बैंक के रीजनल मैनेजर किशोर कुंभारे ने खुद मिलकर अमर की बात समझी। एक महीने में 3 दिसंबर, 2015 को सभी हाउसिंग फाइनेंस कंपनियों को सर्कूलर जारी हुआ कि अब दृष्टिहीनों को खुद के नाम पर लोन मिलेगा। इन दिनों अमर कुछ ऐसा ही बदलाव हैल्थ और मेडिकल इंश्योरेंस के क्षेत्र में लाने के प्रयास में जुटे हैं। वे कहते हैं कि कई कंपनियां दिव्यांगों का बीमा नहीं करतीं जबकि वे भी इसके हकदार हैं।
अमर के एक दृष्टिहीन दोस्त को एक्सिस बैंक ने एटीएम कार्ड नहीं दिया। अमर ने सीधे बैंक की एमडी को ई-मेल कर विरोध जताया। एमडी ने सिर्फ जवाब भेजा बल्कि बैंक का नियम भी बदल दिया। अब बैंक में दृष्टिहीनों को एटीएम कार्ड मिलते हैं। ऐसे ही एसबीआई में थंब इंप्रेशन वालों काे ऑनलाइन ट्रांजेक्शन की सुविधा, सैलेरी अकाउंट का डेबिट कार्ड मिलना भी अमर की देन है।
यूनिवर्सिटी में बिना सहायक शुरू करवाई परीक्षा
10वींमें 64 और 12वीं में 74 प्रतिशत नंबर लाने वाले अमर जब 2008 में देहरादून की यूनिवर्सिटी ऑफ पेट्रोलियम एंड एनर्जी स्टडीज में प्रवेश लेने गए तो देख पाने के कारण उन्हें मना कर दिया गया। अमर कोर्ट गए और जीते तो यूनिवर्सिटी का नियम ही बदल गया। हालांकि अमर ने मुंबई की गवर्नमेंट लॉ कॉलेज में एलएलबी में प्रवेश लिया। उन्होंने परीक्षा के समय कंप्यूटर इस्तेमाल करने की इजाजत मांगी। नहीं मिली। सहायक लेने को कहा गया। अमर ने यूजीसी के नियम दिखाए तो पहले सेमेस्टर की परीक्षा के लिए इजाजत मिली। अगले साल फिर लड़े और तीसरे सेमेस्टर में उन्हें सभी 10 सेमेस्टर की परीक्षा में खुद ही कंप्यूटर और स्क्रीन से पढ़ने वाले वाले सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल करने की इजाजत मिल ही गई। ऐसा करने वाले वे मुंबई विवि के पहले स्टूडेंट बने और अपने ही जैसे अन्य दिव्यांगों के लिए राह आसान कर दी।