मोंटू की बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका खारिज

4 वर्ष पहले
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जोधपुर | राजस्थानहाईकोर्ट के न्यायाधीश गोपालकृष्ण व्यास मनोज कुमार गर्ग की खंडपीठ ने खतरनाक अपराधी किशन कुमार उर्फ मोंटू को राजपासा में निरुद्ध करने के खिलाफ दायर की गई बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका को खारिज कर दिया है। याचिकाकर्ता सुभाषचंद्र की ओर से पेश की गई याचिका में बताया गया कि पुलिस ने अवैधानिक रूप से किशन कुमार उर्फ मोंटू को बंधक बनाकर जेल भेज दिया है। सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता शिवकुमार व्यास ने पक्ष रखते हुए जोधपुर पुलिस कमिश्नर अशोक राठौड़ की ओर से रिपोर्ट पेश करते हुए बताया कि मोंटू पिछले काफी समय से गंभीर प्रवृति के अपराधों में लिप्त होकर सरगना बना हुआ है। जालोर जोधपुर महानगर के सीमावर्ती थानों सहित अन्य थाना क्षेत्रों में कोई भी परिवादी भय के कारण मुंह खोलने को तैयार नहीं है। जोधपुर कमिश्नरेट में कई वारदातों को अंजाम दे चुका है। किशन कुमार उर्फ मोंटू के खिलाफ अब तक कुल 24 प्रकरण दर्ज हैं। 24 में से 9 प्रकरणों में न्यायालय से निस्तारण हो चुका है। शेष 15 मामले अभी विचाराधीन हैं। ऐसे खतरनाक अपराधी का स्वच्छंद रहना मानव जीवन, लोक स्वास्थ्य लोक शांति को प्रभावित करता है, इसीलिए पुलिस कमिश्नरेट ने मोंटू के विरुद्ध राजस्थान समाज विरोधी क्रियाकलाप निवारण अधिनियम 2006 की धारा 3 के अंतर्गत निरुद्ध किया है। कोर्ट ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका खारिज कर दी।

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