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सुप्रीम कोर्ट का हैडमास्टरों के पक्ष में फैसला पूर्व में आरक्षित सीटों पर लाभ देने के आदेश

4 वर्ष पहले
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राजस्थानहाईकोर्ट की डबल बेंच के बाद सुप्रीम कोर्ट में प्रिंसिपल पद के लिए 67 अनुपात 33 के तहत पदोन्नति देने के मामले में राजस्थान शिक्षा प्राध्यापक संघ रेसला द्वारा अपील दायर करने पर सुप्रीम कोर्ट ने हैडमास्टरों को इसका लाभ देने के आदेश दिए हैं। रेसला और रेसा के बीच लंबे समय से 67 अनुपात 33 को लेकर चल रहा विवाद कोर्ट तक पहुंचा।

यह मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा। रेसला ने प्रदेश में कुल 2800 प्रिंसिपल के रिक्त पदों पर 33 प्रतिशत सीटों पर सैकंडरी स्कूल के हैडमास्टर को लगाने और व्याख्याताओं की संख्या अधिक होने के कारण 67 प्रतिशत सीटों पर व्याख्याताओं को इसका लाभ देने की पैरवी की। इस पर रेसा की ओर से सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल, चारू माथुर पीएन मिश्रा ने पैरवी करते हुए इसे गलत ठहराया और कहा कि हैडमास्टरों की गत वर्ष 950 सीटें आरक्षित थीं और इस साल बढ़कर करीब 1700 पहुंच गई हैं। ऐसे में हैडमास्टरों के कोटे से व्याख्याताओं को इसका लाभ देना गलत है।

दोनों पक्षों को सुनने के बाद कोर्ट ने हैडमास्टरों के पक्ष में फैसला सुनाते हुए उनको पूर्व में आरक्षित सीटों पर इसका लाभ देने के आदेश दिए। इस दौरान राज्य सरकार की ओर से संयुक्त निदेशक नूतन बाला कपिला, डीईओ विधि श्यामसुंदर शर्मा ज्ञानरूप माथुर मौजूद थे। वहीं रेसा की ओर से देवी बिजाणी, पूनम सोनी, रेसा के प्रदेश महामंत्री कृष्ण गोदारा, मनीराम लेगा, कैलाश बड़गुजर, जगदीशप्रसाद मीणा, नरपतसिंह बाणियावास उपस्थित थे।

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